
मुंबई। महाराष्ट्र शासन के संसदीय कार्य विभाग ने अपने स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर मंगलवार को विभाग के कार्यों में पारदर्शिता और सुसंगतता लाने के उद्देश्य से तीन महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में उच्च व तकनीकी शिक्षा तथा संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा कि यह पहली बार है जब विभाग ने स्वयं की मार्गदर्शिका प्रकाशित की है। संसदीय कार्य विभाग की स्थापना 1 जुलाई 1975 को हुई थी, जो प्रारंभ में सामान्य प्रशासन विभाग का हिस्सा था, लेकिन 8 जनवरी 2016 को इसे स्वतंत्र विभाग का दर्जा मिला। राज्य सरकार और विधानमंडल के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करने वाले इस विभाग के लिए यह स्वर्णिम वर्ष महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। मंत्री पाटील ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ‘विकसित महाराष्ट्र, विकसित भारत’ के विजन को साकार करने के लिए सुशासन आवश्यक है। इन पुस्तिकाओं से नए अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को विधानमंडल की कार्यप्रणाली समझने में आसानी होगी, जिससे प्रशासनिक कार्यक्षमता में वृद्धि होगी।📘 तीन प्रमुख पुस्तिकाओं की विशेषताएंइस अवसर पर जारी की गई तीन पुस्तिकाएं विभागीय कार्य को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं—विधानमंडल कार्य संचालन मार्गदर्शिका: इसमें तारांकित प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, कटौती प्रस्ताव और अर्धा घंटे की चर्चा जैसी प्रक्रियाओं पर समयबद्ध और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।संसदीय कार्य विभाग जानकारी पुस्तिका: इसमें विभाग की संरचना, कार्यप्रणाली, राज्यपाल के अभिभाषण की तैयारी और गैर-सरकारी विधेयकों के संचालन की प्रक्रिया का विस्तृत विवरण दिया गया है।सार संग्रह: इस पुस्तिका में विभिन्न महत्वपूर्ण शासन निर्णयों और परिपत्रों को एकत्रित किया गया है, जिससे प्रशासनिक निर्णय लेते समय आवश्यक संदर्भ एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगे।कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों की उपस्थिति में इन पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, गति और दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।




