Monday, April 13, 2026
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वैश्विक हिंसा पर IRSC की अपील: धर्म के नाम पर हिंसा अस्वीकार्य, संवाद और नैतिक जिम्मेदारी पर जोर

मुंबई। इंटर-रिलीजियस सॉलिडेरिटी काउंसिल (आईआरएससी) ने दुनिया भर में बढ़ती हिंसा और धार्मिक ध्रुवीकरण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संयम, जवाबदेही और नैतिक चिंतन की अपील की है। सोमवार को जारी अपने बयान में काउंसिल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर धार्मिक पहचान को संघर्ष से जोड़ने की प्रवृत्ति खतरनाक होती जा रही है और इसे रोकने के लिए संवाद को प्राथमिकता देना आवश्यक है। “वैश्विक संकट के समय में आस्था, हिंसा और नैतिक ज़िम्मेदारी पर” शीर्षक से जारी बयान में आईआरएससी ने उन धार्मिक नेताओं के प्रति एकजुटता जताई जो युद्ध के बजाय बातचीत का समर्थन कर रहे हैं। काउंसिल ने पोप लियो XIV के हालिया ईस्टर संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व नेताओं को “जीत और प्रभुत्व की इच्छा त्यागकर संवाद को प्राथमिकता” देनी चाहिए। काउंसिल ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों की आवाज़ों को भी सामने लाते हुए रेव. मुन्थर आइज़ैक के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील की थी—“हमसे बात करें, हमारे बारे में नहीं।” आईआरएससी के अनुसार, यह दृष्टिकोण मानवीय पीड़ा को समझने और उसे कम करने के लिए प्रत्यक्ष संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करता है। बयान में कहा गया कि विभिन्न धर्मों के भीतर भी हिंसा के खिलाफ नैतिक विरोध मौजूद है। काउंसिल ने उदाहरण देते हुए बताया कि कई यहूदी समूहों ने हालिया सैन्य कार्रवाइयों, विशेष रूप से लेबनान में बमबारी को लेकर चिंता जताई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि किसी भी धर्म में हिंसा का समर्थन सर्वसम्मति से नहीं किया जाता। आईआरएससी ने दो टूक कहा कि कोई भी धर्म तब अपनी नैतिक वैधता खो देता है जब उसका इस्तेमाल दूसरों के खिलाफ हिंसा, बहिष्कार या अमानवीकरण को सही ठहराने के लिए किया जाता है। काउंसिल के अनुसार, करुणा और जवाबदेही सभी धर्मों की साझा नींव हैं और इन्हीं मूल्यों के आधार पर वैश्विक शांति कायम की जा सकती है। भारत के संदर्भ में काउंसिल ने चेतावनी दी कि बढ़ता ध्रुवीकरण, गलत सूचना और पहचान आधारित राजनीति सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे में बहुलवादी समाज में शांति बनाए रखने के लिए विनम्र संवाद और नैतिक प्रतिबद्धता बेहद जरूरी है। अंत में आईआरएससी ने कहा कि वह प्रतीकात्मक सह-अस्तित्व से आगे बढ़कर वास्तविक और सार्थक अंतरधार्मिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि समकालीन चुनौतियों का ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जा सके।

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