Tuesday, April 7, 2026
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ताडोबा में ‘रीवाइल्डिंग’ परियोजना को मिली रफ्तार, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रोत्साहन और समर्थन से ताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व में पारिस्थितिक पुनरुद्धार (रीवाइल्डिंग) परियोजना को गति मिली है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत महाराष्ट्र वन विभाग ने सोमवार को ज़ेरोधा और फ़ार्मर्स फ़ॉरेस्ट्स के साथ सामंजस्य समझौता (MoU) किया है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालीन पर्यावरणीय पुनर्स्थापन, जैव विविधता में वृद्धि और जलवायु लचीलापन को मजबूत करना है। यह राज्य की पहली व्यापक लैंडस्केप पुनर्स्थापन परियोजना मानी जा रही है, जिसमें संरक्षित वन, सामुदायिक भूमि, कृषि क्षेत्र, घासभूमि और जलस्रोतों को एकीकृत रूप से शामिल किया गया है। चंद्रपुर जिले में स्थित यह टाइगर रिज़र्व लगभग 1,727 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और यहां 80 से अधिक बाघों के साथ तेंदुए, जंगली कुत्ते, भालू, गौर, विभिन्न हिरण प्रजातियां, भारतीय अजगर और 195 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिससे यह मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण जैव विविधता केंद्र बनता है। हालांकि, बाघों की बढ़ती संख्या और बफर क्षेत्रों में मानव बस्तियों के विस्तार के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष और आवास विखंडन जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। इस परियोजना के तहत 800 एकड़ से अधिक क्षतिग्रस्त भूमि का पुनर्स्थापन, 15,000 से अधिक ग्रामीण रोजगार दिवसों का सृजन और 100 से अधिक स्थानीय वृक्ष, झाड़ियों व घास प्रजातियों का रोपण एवं संरक्षण किया जाएगा। यह पहल पारंपरिक वृक्षारोपण से आगे बढ़कर प्राकृतिक पारिस्थितिक प्रक्रियाओं की बहाली, आवास की जटिलता बढ़ाने और वन्यजीवों के मुक्त आवागमन को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है, जिससे यह पहल वन्यजीवों, स्थानीय समुदायों और जलवायु—तीनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। विभिन्न भू-प्रकारों में समन्वित कार्य से आवास क्षरण के मूल कारणों को दूर कर भविष्य के लिए लचीलापन विकसित किया जा सकेगा।
यह परियोजना पूर्वी महाराष्ट्र में चल रहे व्यापक संरक्षण प्रयासों को मजबूती प्रदान करेगी। वर्ष 2021 से Farmers for Forests लगभग 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कार्य कर रही है। इनके प्रयासों में वन संरक्षण, वनीकरण, सामुदायिक सहभागिता, जनजागरूकता, अग्नि प्रबंधन, ऊर्जा-कुशल चूल्हों का वितरण तथा आवास सुधार शामिल हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिल रही है। वहीं ज़ेरोधा अपनी आय का 10 प्रतिशत सामाजिक और पर्यावरणीय कार्यों में निवेश करती है और अपने रेनमैटर फाउंडेशन के माध्यम से जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा दे रही है; कंपनी ने 2025 में ‘ज़ेरोधा रीवाइल्डिंग फंड’ के तहत 100 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है, जिसके जरिए यह परियोजना लागू की जा रही है। कुल मिलाकर, यह संयुक्त पहल पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और सतत विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है, जो भविष्य में देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा साबित हो सकती है।

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