
मुंबई (इंद्र यादव)। ठाणे स्थित ठाणे सिविल अस्पताल इन दिनों अपनी बदहाली, गंदगी और अव्यवस्था को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। सोशल एक्टिविस्ट और पत्रकार डॉ. बीनू वर्गीस द्वारा सामने लाई गई तस्वीरों और रिपोर्ट ने स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े हो गए हैं।अस्पताल के वार्डों की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है, जहां मरीजों को गंदगी, बदबू और अस्वच्छ माहौल में इलाज के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। HIV जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भी पर्याप्त साफ-सफाई और देखभाल नहीं मिल रही, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि जहां दवाओं और स्वच्छता की उम्मीद होती है, वहां सड़ांध और लापरवाही का माहौल देखने को मिल रहा है। पेयजल व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। अस्पताल के वॉटर फिल्टर के आसपास कचरा, गंदगी और काई जमी होने की बात सामने आई है, जिससे साफ पानी की उपलब्धता पर भी संदेह पैदा हो गया है। यह स्थिति मरीजों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य के लिए अतिरिक्त खतरा बन सकती है।इस बीच, यह भी सवाल उठ रहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवंटित बजट और सफाई व्यवस्था पर खर्च होने वाले पैसे का सही उपयोग हो रहा है या नहीं। अस्पताल में व्याप्त गंदगी को देखते हुए सफाई ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, डॉ. बीनू वर्गीस की रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया। डॉ. श्रीकृष्ण पंचाल ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें कई खामियां सामने आईं—फायर एक्सटिंग्विशर्स की एक्सपायरी, ICU का बंद AC और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को तुरंत सुधार के निर्देश दिए गए।फिलहाल कुछ सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बदलाव स्थायी होगा या कुछ समय बाद स्थिति फिर से वैसी ही हो जाएगी। नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि अब केवल कागजी सुधार नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई और सिस्टम में स्थायी सुधार की आवश्यकता है, ताकि ठाणे के नागरिकों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।




