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राहुल गांधी का आरोप: ‘विदेशी निगरानी छिपाकर सरकार देश की सुरक्षा से कर रही खिलवाड़’

नई दिल्ली। नई दिल्ली में डेटा सुरक्षा, विदेशी तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने और विदेशी निगरानी से जुड़े खतरों को दबाने की कोशिश कर रही है, जिससे हर भारतीय की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। सोशल मीडिया पर जारी अपने विस्तृत बयान में राहुल गांधी ने इसे “भारत को अंधेरे में रखने की सोची-समझी साजिश” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही सरकार ने चीनी सीसीटीवी कैमरों के सार्वजनिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की बात कही हो, लेकिन सरकारी इमारतों के भीतर अब भी ऐसे कैमरे लगे हुए हैं, जो डेटा सुरक्षा के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकते हैं। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि जिन चीनी मोबाइल ऐप्स पर पहले प्रतिबंध लगाया गया था, वे अब बदले हुए नामों के साथ दोबारा सक्रिय हो रहे हैं। साथ ही, विदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्लेटफॉर्म संवेदनशील भारतीय डेटा को प्रोसेस कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस पूरे मुद्दे पर स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी देने में असफल रही है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 25 मार्च को लोकसभा में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से कई अहम सवाल पूछे थे। इन सवालों में यह शामिल था कि देश में लगे सीसीटीवी कैमरे किन देशों से आए हैं, उनमें से कितने सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं, कौन-कौन से विदेशी एआई प्लेटफॉर्म सरकारी डेटा प्रोसेस कर रहे हैं और किन प्रतिबंधित ऐप्स ने नए नामों के साथ वापसी की है। उनका आरोप है कि मंत्रालय के जवाब में इन सवालों के ठोस उत्तर नहीं दिए गए। “न कोई आंकड़े, न कोई स्पष्ट जानकारी, यहां तक कि एक भी प्लेटफॉर्म का नाम नहीं बताया गया। राहुल गांधी ने यह भी याद दिलाया कि सरकार ने पहले यह स्वीकार किया था कि उसके उपयोग में आने वाले लगभग दस लाख चीनी कैमरे डेटा ट्रांसफर के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसके बावजूद, अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वर्तमान में उपयोग किए जा रहे कैमरे पूरी तरह सुरक्षित हैं या नहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि “अपनी नाकामियों को छिपाने और विदेशी निगरानी की सच्चाई को दबाने की कोशिश करके, मोदी सरकार देश के हर नागरिक की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है। वहीं, सरकार की ओर से इन आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि सरकार साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिमों के प्रति पूरी तरह जागरूक है और पिछले वर्षों में डिजिटल ढांचे को सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि भारत के टेलीकॉम नेटवर्क की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 2021 में “ट्रस्टेड सोर्स” से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा निर्देश लागू किए गए, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश में केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही टेलीकॉम उपकरण लगाए जाएं। इसके अलावा, सरकार ने टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 को लागू किया है, जिसमें टेलीकॉम नेटवर्क की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक प्रावधान शामिल हैं। साथ ही डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2022 के जरिए नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। मंत्री ने यह भी कहा कि सीसीटीवी सिस्टम की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने जरूरी मानक और तकनीकी शर्तें निर्धारित की हैं, ताकि बाजार में उपलब्ध उपकरण सुरक्षित और विश्वसनीय हों। फिलहाल, इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष सरकार से पारदर्शिता, जवाबदेही और स्पष्ट आंकड़ों की मांग कर रहा है, वहीं सरकार अपने कदमों को पर्याप्त बताते हुए डिजिटल और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधारों का हवाला दे रही है। आने वाले समय में यह विवाद और गहराने के आसार हैं, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिकों की निजता और तकनीकी संप्रभुता जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दे जुड़े हुए हैं।

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