
मुंबई। मीरा रोड में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हवस और जुनून में अंधे एक कथित टीवी अभिनेता/एडिटर ने अपनी घरेलू नौकरानी की बेरहमी से हत्या कर दी। पीड़िता चार बच्चों की मां थी और मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही थी। Mira Bhayandar Vasai Virar Police की क्राइम ब्रांच ने महज 48 घंटे के भीतर इस मामले को सुलझाते हुए आरोपी को विशाखापट्टनम रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। यह दर्दनाक घटना 25 मार्च 2026 की शाम मीरा रोड स्थित चंद्रेश आर्केड की तीसरी मंजिल के एक फ्लैट में हुई। 36 वर्षीय सुमन कांबले पिछले तीन-चार वर्षों से इस घर में काम कर रही थीं और काशीमीरा इलाके में अपने पति व चार बच्चों के साथ रहती थीं। रोजमर्रा की आर्थिक तंगी के बावजूद वह मेहनत से अपने परिवार का जीवन चला रही थीं। पुलिस के अनुसार, आरोपी आशीष मदन मेश्राम (37), जो खुद को टीवी अभिनेता और एडिटर बताता था, लंबे समय से सुमन पर शारीरिक संबंध बनाने और यहां तक कि शादी करने का दबाव बना रहा था। सुमन ने बार-बार इसका विरोध किया और अंततः नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया। घटना वाले दिन आरोपी ने किसी बहाने से सुमन को फ्लैट में बुलाया और एक बार फिर अपने इरादे जाहिर किए। सुमन के सख्त इनकार से गुस्साए आरोपी ने चाकू से उनके गले, छाती और पेट पर कई वार किए। गंभीर रूप से घायल सुमन ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया। इस हृदयविदारक घटना की खबर मिलते ही सुमन के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। चार मासूम बच्चों ने अपनी मां को खो दिया, जबकि पति सदमे में है। पड़ोसियों के मुताबिक सुमन बेहद सरल और मेहनती महिला थीं, जिनका किसी से कोई विवाद नहीं था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एमबीवीवी पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने तेजी से जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसकी लोकेशन ट्रैक की गई। डीसीपी संदीप धोइपोड़े के नेतृत्व में टीम ने विशाखापट्टनम पहुंचकर आरोपी को रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस इसे पूरी तरह पूर्व नियोजित (प्री-प्लान्ड) हत्या मान रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है। यह घटना महिलाओं, खासकर घरेलू कामगारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंताजनक स्थिति उजागर करती है। शहर की चकाचौंध के पीछे छिपे ऐसे अपराध यह सवाल उठाते हैं कि क्या मेहनतकश और कमजोर वर्ग की महिलाएं वास्तव में सुरक्षित हैं। समाज और प्रशासन दोनों के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सख्त कार्रवाई और जागरूकता बेहद जरूरी है। पीड़ित परिवार अब न्याय की उम्मीद में है और पूरे समाज की मांग है कि दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।




