
देवेश प्रताप सिंह राठौर
झाँसी, उत्तर प्रदेश। कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में आयोजित अभियोजन समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अपर जिलाधिकारी शिव प्रताप शुक्ल ने लंबित वादों के निस्तारण की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने उपस्थित शासकीय अधिवक्ताओं से एक-एक प्रकरण में की गई कार्रवाई की जानकारी ली और निर्देश दिया कि प्रभावी पैरवी करते हुए अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण सरकार के पक्ष में कराया जाए। बैठक में एडीएम ने पुलिस अधिकारियों और अधिवक्ताओं को निर्देशित किया कि एनडीपीएस एक्ट 1988 के तहत नशे के कारोबार में लिप्त अपराधियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों, विशेषकर धारा 354 के प्रकरणों पर गंभीरता से चर्चा करते हुए अपराधियों को सजा दिलाने पर जोर दिया गया। समीक्षा के दौरान एडीएम ने विशेष लोक अभियोजक विजय सिंह कुशवाहा द्वारा प्रभावी पैरवी के माध्यम से तीन महत्वपूर्ण मामलों में दिलाई गई सजा की सराहना की। इनमें सरकार बनाम शाहिद (3 वर्ष कारावास), सरकार बनाम कमलेश वर्मा उर्फ छोटू (10 वर्ष कारावास) और सरकार बनाम महेन्द्र पाल (10 वर्ष कारावास व जुर्माना) शामिल हैं। एडीएम ने निर्देश दिया कि गैंगस्टर, महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों का निर्धारित समयसीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि न्याय समय पर मिलना चाहिए, यही प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अधिकतम सजा दिलाने पर जोर दिया। बैठक में लंबित मामलों की सूची तैयार कर उन पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए गए, ताकि पुराने मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सके। साथ ही विवेचकों को संवेदनशीलता के साथ गुणवत्ता और समयबद्ध जांच करने तथा साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए, जिससे न्यायालय में मजबूत पक्ष प्रस्तुत किया जा सके। एडीएम ने महिला अपराध, हत्या, अपहरण और बलात्कार जैसे गंभीर मामलों का अलग चार्ट तैयार करने के निर्देश दिए। POCSO Act के तहत मामलों में पैरोकार नियुक्त करने और लक्ष्य निर्धारित कर अधिकतम दोषसिद्धि सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि अपराधियों में कानून का भय स्थापित हो सके। समीक्षा बैठक में ई-प्रॉसिक्यूशन पोर्टल पर नियमित फीडिंग, SC/ST Act के मामलों की प्रगति, आबकारी अपराधों पर कार्रवाई, खाद्य अपमिश्रण, श्रम विभाग से जुड़े मामलों, मिशन शक्ति, जुवेनाइल एक्ट और आर्म्स एक्ट जैसे विषयों पर भी गहन चर्चा की गई। बैठक में डॉ. आरविन्द कुमार, संयुक्त निदेशक अभियोजन देशराज सिंह, डीजीसी मृदुलकांत श्रीवास्तव, विशेष लोक अभियोजक दीपक तिवारी सहित कई अधिकारी एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे। अंत में एडीएम ने कहा कि शासन के निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन करते हुए ऐसी प्रभावी पैरवी की जाए, जिससे जनपद के अपराधियों में कानून का भय स्थापित हो और कोई भी अपराधी सजा से बच न सके।




