Sunday, March 15, 2026
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व्यंग्य: अविश्वास है, तो है…

लेखक-सुधाकर आशावादी

सुधाकर आशावादी
मुझे अविश्वास प्रस्ताव लाना है।
मुझे नहीं हमें कहो, तुम अकेले अविश्वास प्रस्ताव नहीं ला सकते, पर अविश्वास प्रस्ताव लाना क्यों है ?
हैड मास्टर मुझे क्लास में बोलने नहीं देता।
क्यों बोलने नहीं देता?
मुझे क्या पता, क्यों नहीं बोलने देता, मैं कुछ भी बोलता हूँ, तो कहता है, कि विषय पर बोलो।
क्या तुम विषय पर नहीं बोलते ?
मैं अपने हिसाब से अपने विषय पर बोलता हूँ। कभी बोलता हूँ, कभी नहीं भी बोलता।
हैड मास्टर सही तो बोलता है, विषय पर बोलोगे, तो बोलने देगा।
मैं कुछ नहीं जानता, मैं इतना जानता हूँ, कि मैं ही विषय पर बोलता हूँ, मेरे अलावा कोई ऐसे विषय पर नहीं बोलता, जैसे विषय पर मैं बोलता हूँ।
कोई तो कारण होगा, जो तुम्हें बोलने से रोका जाता है?
यह तो वही जाने, अब मुझे उसके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाना है।
अविश्वास प्रस्ताव में क्या कहेंगे?
यही, कि हेडमास्टर भेदभाव करता है। अपने चहेते बालकों को बोलने की परमीशन देता है ,जब भी मैं बोलने के लिए खड़ा होता हूँ, तो रोक टोक करता है।
कोई तो कारण होगा?
मैं इतिहास की क्लास में खड़े होकर जब जूडो कराटे के दांव समझाता हूँ, तो वह कहता है विषय पर बोलो।
सही तो कहता है, विषय पर बोलो, जब विषय से भटक कर उटपटांग बेसिर पैर की बातें करोगे तो वह विषय पर बोलने के लिए कहेगा ही।
मैं विषय पर ही तो बोलता हूँ।
क्लास के विषय पर या अपने विषय पर।
अपने मनमाफिक विषय पर, जो मैं बोलना चाहता हूँ, बोलता हूँ।
क्लास के विषय पर बोलना चाहिए।
मेरी मर्जी, मैं किसी भी विषय पर बोलूं। जो विषय मेरी समझ में आएगा, उसी पर तो बोलूंगा।
कोई बात नहीं, पर इसमें अविश्वास की बात कहाँ से आ गई?
मुझे ऐसा मास्टर नहीं चाहिए, जो मुझे बोलने से रोके, मेरे मुँह पर टेप चिपकाने की कोशिश करें। आखिर मैं स्वतंत्र देश का स्वतंत्र नागरिक हूँ। मुझे अपने मन की बात करने का पूरा अधिकार है।
यह तो बताओ, कि अविश्वास प्रस्ताव लाने से हासिल क्या होगा?
अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे, हेडमास्टर को हटाएंगे।
क्या तुम्हें विश्वास है, कि तुम हेडमास्टर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव को पास करा पाओगे ? अपने साथियों का इतना समर्थन जुटा पाओगे, कि हेडमास्टर को हटाया जा सके।
मुझे पास फेल से कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं बार बार फेल होता हूँ, फिर भी हिम्मत नहीं हारता।
तुम हिम्मत नहीं हारते, मगर तुम्हारा साथ निभाने वालों की तो बेइज्जती होती है।
होती रहे, मुझे क्या, मुझे तो अविश्वास प्रस्ताव लाना है, हेडमास्टर को सबक सिखाना है।
यदि अविश्वास प्रस्ताव फेल हो गया, तब किस मुँह से हेडमास्टर के सम्मुख जाओगे ?
इसी मुँह से जिससे हर बार जाता हूँ।
अपनी नहीं तो अपने साथियों की इज्जत का तो ध्यान रखो।
इज्जत बेइज्जत से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।
लगता है कि तुम नहीं सुधरोगे।
यह सुधरना किस चिड़िया का नाम है?
तुम्हारे लिए किसी चिड़िया का नहीं। जाओ विदेश घूम आओ, मौज मस्ती सैर सपाटा कर आओ, बाकी हम हैं न, तुम्हारी हर सनक का बचाव करने ले लिए।

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