Wednesday, March 4, 2026
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प्लास्टिक के विकल्प के रूप में बांस उत्पादन को बढ़ावा देगा राज्य सरकार: वन मंत्री गणेश नाईक

मुंबई। प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से पर्यावरण संतुलन पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार ने बांस की खेती और उससे जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। बांस उत्पादन, प्रसंस्करण और बाजार सृजन के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। बुधवार को यह जानकारी वन मंत्री गणेश नाईक ने दी। विधानसभा में सदस्य चेतन तुपे और राजकुमार बडोले द्वारा प्लास्टिक के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और बांस उद्योग को बढ़ावा देने संबंधी ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, जिस पर मंत्री नाईक ने उत्तर दिया। मंत्री नाईक ने बताया कि राज्य के किसानों और आदिवासी समुदाय में बांस की खेती के लिए जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। किसानों को मुफ्त बांस पौधे देने के साथ तीन वर्षों तक आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी। रोजगार गारंटी योजना के तहत प्रति हेक्टेयर 7 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। एक हेक्टेयर के लिए 500 पौधे और गैप फिलिंग हेतु 100 पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। टिश्यू कल्चर के गुणवत्तापूर्ण पौधों की उपलब्धता पर जोर दिया जा रहा है। पहले वर्ष प्रति पौधा 90 रुपये, दूसरे वर्ष 50 रुपये और तीसरे वर्ष 35 रुपये का अनुदान दिया जाता है। बांस बोर्ड और औद्योगिक विकास महामंडल के माध्यम से बांस आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। एक इकाई के लिए लगभग 10 लाख रुपये तक ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। खिलौने, फर्नीचर, पत्तल-दोने जैसे उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देने हेतु प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। बांस उत्पादों को मॉल में बिक्री के लिए स्थान उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है।
आदिवासी और बुरुड समाज के लिए विशेष पहल
वन क्षेत्र की बंजर भूमि पर बांस की खेती करने का आह्वान किया गया है। बुरुड समाज को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराने के प्रति सरकार सजग रहेगी। कच्चा माल उपलब्ध न कराने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बुरुड समाज के युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उनकी पारंपरिक कला को बाजार से जोड़ने की योजना है।
संयुक्त वन प्रबंधन को मिलेगा बल
राज्य में लगभग 12 हजार गांवों में संयुक्त वन प्रबंधन योजना संचालित है। वन उपज की बिक्री से प्राप्त राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा गांवों के विकास के लिए उपयोग किया जाता है। ग्राम पंचायत, वन विभाग और स्वयंसेवी संस्थाओं के समन्वय से बांस की खेती को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इस चर्चा में विजय वडेट्टीवार, नाना पटोले, शेखर निकम, राजू तोडसाम, किशोर जोरगेवार तथा डॉ. विनय कोरे ने भी भाग लिया।

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