
मुंबई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के कारण बाजार और रोजगार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। सक्षम और सशक्त प्रशासन के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने शासकीय कार्यों में ‘एआई’ के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर देना शुरू कर दिया है, ऐसा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा। मंगलवार को मुंबई में आयोजित नैसकॉम टेक्नोलॉजी एंड लीडरशिप फोरम 2026 में पत्रकार विष्णु सोम द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अपने विचार व्यक्त किए। इस चर्चा सत्र में माइक्रोसॉफ्ट इंडिया की अध्यक्ष सिंधू गंगाधरन तथा पीडब्ल्यूसी इंडिया के अध्यक्ष संजीव कृष्णन भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन प्रणाली में एआई का उपयोग बढ़ाकर सशक्त डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। राज्य की शैक्षणिक संस्थाओं और उद्योग क्षेत्र के बीच समन्वय बढ़ाकर एआई-सक्षम मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। इसके लिए मुंबई में राज्य की सभी शैक्षणिक संस्थाओं हेतु कार्यशाला आयोजित की जाएगी। बदलती तकनीक के कारण रोजगार के अवसरों का स्वरूप परिवर्तित हो रहा है, इसलिए शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलावों पर भी विचार किया जाएगा।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में भारत का वैश्विक नेतृत्व
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि हाल ही में दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक में ब्राजील के एक मंत्री ने कहा कि वे भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के अनुभव के आधार पर अपनी प्रणाली विकसित कर रहे हैं। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में भारत वर्तमान में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है।
कृषि क्षेत्र में ‘एग्रीस्टैक’ और ‘महाविस्तार’ का उपयोग
मुख्यमंत्री ने हाल ही में आयोजित ‘एआई 4 एग्री’ शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘एग्रीस्टैक’ पहल के अंतर्गत महाराष्ट्र के प्रत्येक किसान की भूमि, फसल और अन्य जानकारी एकत्र की जा रही है। वहीं ‘महाविस्तार’ एआई ऐप के माध्यम से जनरेटिव एआई का उपयोग कर प्रत्येक पंजीकृत किसान को व्यक्तिगत डिजिटल सहायक उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 30 लाख किसान इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। इन पहलों से कृषि उत्पादन लागत में 25 से 40 प्रतिशत तक कमी आने और अनिश्चितता घटने की संभावना है।
नीतिनिर्माण में उद्योगों की भागीदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नीतिनिर्माण अब ‘पॉलिसी-लेड ग्रोथ’ के सिद्धांत पर आधारित है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति तैयार करते समय विभिन्न उद्योग संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। रिपोर्ट के अनुसार, पुणे शहर जीसीसी पारिस्थितिकी तंत्र में देश में अग्रणी बना है। साथ ही लॉजिस्टिक काउंसिल के सहयोग से तैयार लॉजिस्टिक नीति को भविष्य उन्मुख बताया गया। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो रहा है, इसलिए इस क्षेत्र में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अलग नीति तैयार की जा रही है। इसके लिए Confederation of Indian Industry सहित विभिन्न सेक्टर काउंसिल्स के साथ सहयोग किया जाएगा। एआई से रोजगार समाप्त होने की आशंका पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कंप्यूटर क्रांति के समय भी ऐसी आशंकाएं व्यक्त की गई थीं, लेकिन भारत ने आईटी क्षेत्र में बड़ी प्रगति की। एआई को खतरे के रूप में नहीं, बल्कि प्रगति के अवसर के रूप में देखना चाहिए। रोजगार का स्वरूप बदलेगा और नए अवसर पैदा होंगे। आज ‘क्रिएटर’ एक नया व्यवसाय बन चुका है, जिसकी कुछ वर्ष पहले कल्पना भी नहीं थी। नई पीढ़ी तकनीक को तेजी से अपना रही है और बदलाव को स्वीकार करना समय की आवश्यकता है।




