Thursday, March 12, 2026
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अहिल्यानगर की लेफ्टिनेंट कर्नल सीता शेलके को ‘सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार–2026’

वायनाड भूस्खलन में अद्भुत साहस और इंजीनियरिंग कौशल के लिए केंद्र सरकार करेंगी सम्मानित

नई दिल्ली। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में असाधारण साहस, नेतृत्व और तकनीकी दक्षता का परिचय देने वाली अहिल्यानगर की लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेलके को केंद्र सरकार द्वारा ‘सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार–2026’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती के अवसर पर मनाए जाने वाले ‘पराक्रम दिवस’ पर इस पुरस्कार की घोषणा की गई। देशभर से प्राप्त 271 नामांकनों में से व्यक्तिगत श्रेणी में लेफ्टिनेंट कर्नल सीता शेलके का चयन किया गया है। यह पुरस्कार वर्ष 2024 में केरल के वायनाड में हुए भीषण भूस्खलन के दौरान उनके अद्वितीय कार्य के लिए दिया जा रहा है। प्राकृतिक आपदा के दौरान अत्यंत प्रतिकूल मौसम और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में उन्होंने बचाव अभियान का नेतृत्व करते हुए सैकड़ों नागरिकों की जान बचाई। उनके नेतृत्व में चूरलमाला क्षेत्र में मात्र रिकॉर्ड समय में 190 फुट लंबे बेली ब्रिज का निर्माण किया गया, जिससे संपर्क टूट चुके दुर्गम इलाकों तक राहत सामग्री और बचाव दल पहुंच सके। इसके अलावा, लेफ्टिनेंट कर्नल शेलके ने कोमात्सु पीसी-210 एक्सकैवेटर का अभिनव उपयोग करते हुए केवल चार घंटे में एक अस्थायी पैदल पुल तैयार किया, जिससे राहत कार्य को बड़ी गति मिली। उनकी इसी असाधारण इंजीनियरिंग सूझबूझ और त्वरित निर्णय क्षमता ने आपदा प्रबंधन को नई दिशा दी। प्रत्यक्ष बचाव कार्यों के साथ-साथ वे अब तक 2,300 से अधिक सैनिकों को आपदा निवारण से जुड़े विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी दे चुकी हैं। अहिल्यानगर जिले के गाडीलगांव की निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल सीता शेलके का जीवन संघर्ष और प्रेरणा का उदाहरण है। उनके पिता अशोक भिकाजी शेलके पेशे से वकील हैं। सीता शेलके ने मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई अहिल्यानगर से पूरी की। प्रारंभ में पुलिस सेवा में जाने का सपना देखने वाली सीता ने बाद में देशसेवा के लिए भारतीय सेना को चुना। कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने कठिन मानी जाने वाली एसएसबी परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्ष 2012 में चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में नियुक्त हुईं। लेफ्टिनेंट कर्नल सीता शेलके को मिला यह सम्मान न केवल उनके साहस और कौशल की पहचान है, बल्कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता और योगदान को भी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करता है।

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