Tuesday, January 13, 2026
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी कमिश्नर की चिट्ठी पर रोक लगाई, अदालत स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी कमिश्नर द्वारा निचली अदालत के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर रिपोर्ट करने के निर्देश वाली चिट्ठी पर रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय ने बीएमसी कमिश्नर के अदालत कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर बुलाने के अधिकार पर भी सवाल उठाया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस अश्विन भोबे की पीठ ने मंगलवार रात मुख्य न्यायाधीश के आवास पर विशेष सुनवाई के दौरान कहा कि बीएमसी कमिश्नर, जो जिला चुनाव अधिकारी के रूप में भी कार्यरत हैं, उन्हें हाईकोर्ट या निचली अदालत के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी के लिए कोई पत्र या संचार जारी करने से रोका जाता है। हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति ने सितंबर 2008 में निर्णय लिया था कि हाईकोर्ट और निचली अदालत के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट दी जाएगी। इसके बावजूद बीएमसी कमिश्नर ने 29 दिसंबर को निचली अदालत के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट देने का अनुरोध अस्वीकार किया।
सुनवाई के दौरान बीएमसी की तरफ से पेश वकील कोमल पंजाबी ने कमिश्नर द्वारा जारी पत्र को वापस लेने की मांग की, लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे अस्वीकार कर दिया। हाईकोर्ट ने बीएमसी कमिश्नर को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें उन शक्तियों का विवरण शामिल हो, जिनके तहत कमिश्नर ने अदालत स्टाफ को चुनाव ड्यूटी पर बुलाने का आदेश दिया। पीठ ने चुनाव आयोग, राज्य चुनाव आयोग और महाराष्ट्र सरकार को भी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट अब इस मामले पर 5 जनवरी को सुनवाई करेगा। भारत के संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत, उच्च न्यायालय अधीनस्थ अदालतों और उनके स्टाफ पर पूरा नियंत्रण और निगरानी का अधिकार रखता है। इसी आधार पर कोर्ट स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट देने का आदेश पारित किया गया था। गौरतलब है कि जिस दिन बीएमसी कमिश्नर ने चिट्ठी जारी की, उसी दिन चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने बीएमसी कमिश्नर और मुंबई कलेक्टर को सूचित किया कि हाईकोर्ट के निचली अदालतों के स्टाफ के लिए पहले से लिया गया प्रशासनिक निर्णय है, जिसके तहत कोर्ट स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट दी जाती है। बावजूद इसके कमिश्नर ने पत्र जारी कर स्टाफ को चुनाव ड्यूटी के लिए बुलाने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने इस पत्र पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की और चुनाव ड्यूटी से संबंधित आदेश की वैधता पर सवाल उठाया। अब कमिश्नर, चुनाव आयोग, राज्य चुनाव आयोग और महाराष्ट्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया है ताकि स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट देने के अधिकार और प्रक्रियाओं का स्पष्ट विवरण उपलब्ध हो।

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