
नागपुर। विदर्भ क्षेत्र में सिकल सेल, थैलेसीमिया और अन्य आनुवंशिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अब इलाज के लिए मुंबई या दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा। नागपुर के एम्स में एक आधुनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) यूनिट की स्थापना की जा रही है, जो इस क्षेत्र की पहली उन्नत सुविधा होगी। इस महत्वपूर्ण पहल की संकल्पना मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की थी, जिसे एनटीपीसी ने अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत आर्थिक सहयोग देकर साकार किया है। इस परियोजना के लिए एम्स नागपुर और एनटीपीसी के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके अंतर्गत एनटीपीसी इस यूनिट की आधारभूत संरचना, दवाओं और ज़रूरतमंद मरीजों के उपचार में सहयोग प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एनटीपीसी के इस समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह यूनिट विशेष रूप से बच्चों, आदिवासी समुदाय और ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए वरदान सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिकल सेल और अन्य आनुवंशिक रोगों के उन्मूलन को राष्ट्रीय लक्ष्य घोषित किया है और नागपुर एम्स में यह बीएमटी यूनिट उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए आवश्यक निधि एनटीपीसी की मदद से जुटाई जा चुकी है, जिससे अब स्थानीय स्तर पर ही उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। इस बीएमटी यूनिट की स्थापना एम्स नागपुर के मिहान परिसर में की जाएगी। इसमें ट्रांसप्लांट से पहले की सभी जांचें, दवाएं, बाहरी विशेषज्ञों की सेवाएं और संपूर्ण उपचार की व्यवस्था की जाएगी। एनटीपीसी के सीएसआर दिशा-निर्देशों के अनुसार, यूनिट में एनटीपीसी का लोगो और उसके सहयोग का उल्लेख स्पष्ट रूप से किया जाएगा। पिछले कई वर्षों से एनटीपीसी स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहा है, और एम्स नागपुर जैसे सरकारी मेडिकल संस्थान के साथ यह साझेदारी समाज के वंचित तबकों तक उन्नत चिकित्सा सेवाएं पहुँचाने की दिशा में एक प्रभावी पहल मानी जा रही है। एम्स नागपुर ने हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय चिकित्सा और अनुसंधान केंद्र के रूप में तेजी से प्रतिष्ठा अर्जित की है। बीएमटी यूनिट की स्थापना से ब्लड कैंसर और अन्य गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को नागपुर में ही इलाज उपलब्ध हो सकेगा, जिससे समय, खर्च और परेशानी में भारी कमी आएगी। यह सुविधा विदर्भ क्षेत्र के हजारों मरीजों के लिए जीवनदायी सिद्ध हो सकती है।




