
मुंबई। संभावित आपदाओं और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए महाराष्ट्र की मुख्य सचिव सुजाता सौनिक ने नागरिक और आपदा प्रबंधन में कार्यरत एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में यह विश्वास नागरिकों में बना रहना चाहिए कि सरकार और प्रशासन उनके साथ मजबूती से खड़ा है। इस संबंध में बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगरानी, राहत, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सोनिया सेठी, शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता, सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय के प्रधान सचिव बृजेश सिंह तथा आपदा प्रबंधन निदेशक सतीश कुमार खड़के सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि आपदा के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि न हो, इसके लिए सभी अधूरे कार्यों, रिटेनिंग वॉल, नालों के किनारे और अन्य खतरनाक स्थलों का नियमित निरीक्षण किया जाए। आवश्यक स्थानों पर चेतावनी संकेत लगाए जाएं और नागरिकों को संभावित जोखिमों के बारे में समय पर सूचित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्थान—जैसे रेलवे स्टेशन, जलापूर्ति केंद्र या परिवहन व्यवस्था—में खतरनाक स्थिति महसूस हो, तो संबंधित सेवा को तत्काल अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाए। एजेंसियों को वस्तुपरक जानकारी देने और आपदा के दौरान आवश्यक उपकरण मुहैया कराने के भी निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि नागरिकों को एक समन्वित प्रणाली के जरिए आपदाओं के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों से अवगत कराया जाए। इसके अलावा, राहत कार्यों और दी जा रही सहायता की जानकारी सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, समाचार पत्रों एवं अन्य संचार माध्यमों के ज़रिए दी जानी चाहिए। सौनिक ने मानसून के दौरान संक्रामक रोगों के खतरे को गंभीरता से लेते हुए कहा कि पानी के नमूनों की जांच कराई जाए और नागरिकों में रोगों को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि संपूर्ण मानसून अवधि में आपदा प्रबंधन एजेंसियां हर स्तर पर सतर्क रहें और समन्वय के साथ कार्य करें। यह बैठक राज्य सरकार की आपदा तैयारियों को समय से पहले मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे नागरिकों को सुरक्षित और सूचित रखते हुए प्रभावी राहत कार्य सुनिश्चित किए जा सकें।




