
मुंबई। मुंबई के सह्याद्री अतिथिगृह में सोलहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगड़िया की अध्यक्षता में हुई बैठक में महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की वित्तीय माँगों को जोरदार ढंग से प्रस्तुत किया। डॉ. पनगड़िया ने महाराष्ट्र के वित्तीय अनुशासन और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उसके योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री अजीत पवार ने आयोग अध्यक्ष तथा सदस्यों डॉ. मनोज पांडा और डॉ. सौम्यकांती घोष का स्वागत करते हुए राज्य सरकार की ओर से ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में केंद्र-राज्य कर वितरण (Vertical Devolution) में राज्यों का हिस्सा 41 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने, उपकर (Cesses) और अधिभार (Surcharges) को प्रमुख करों में शामिल करने तथा केंद्र के गैर-कर राजस्व को भी कर विभाजन में सम्मिलित करने की माँग की गई है। क्षैतिज कर वितरण (Horizontal Devolution) के लिए महाराष्ट्र ने ‘सतत विकास व हरित ऊर्जा’ और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान जैसे नए मानदंडों का प्रस्ताव दिया है, जबकि ‘आय अंतर मानदंड’ (Income Distance Criteria) को 45 प्रतिशत से घटाकर 37.5 प्रतिशत करने की सिफारिश की गई है। राज्य ने विशेष अनुदान के तहत 1,28,231 करोड़ रूपए की माँग की है, जिसमें मुंबई महानगर क्षेत्र का आर्थिक मास्टर प्लान, नदी जोड़ परियोजना, उच्च न्यायालय परिसर, जेल अवसंरचना, चिकित्सा छात्रावास और इको-टूरिज्म जैसी योजनाएँ शामिल हैं। साथ ही, राज्य ने राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) की भी माँग रखी है। आपदा राहत कोष (SDRF) की कुल राशि बढ़ाने और केंद्र-राज्य अंशदान को 75:25 से बदलकर 90:10 करने की माँग के साथ-साथ स्थानीय स्वराज संस्थाओं को दिए जाने वाले अनुदान को 4.23 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी किया गया है, जिसे ग्रामीण और शहरी आबादी के अनुपात में वितरित करने की सिफारिश की गई है। नगर निकायों और महानगरपालिकाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन व अग्निशमन सेवाओं हेतु अलग से अनुदान की भी माँग की गई। इस बैठक में आयोग ने उद्योग जगत, स्थानीय निकायों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत कर राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं को समझने का प्रयास किया।




