
मुंबई। आज की तेज़ और डिजिटल दुनिया में भले ही लोग संपर्क में हैं, लेकिन भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं। मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण प्रत्यक्ष संवाद कम होता जा रहा है। ऐसे में डिजिटल युग में संवाद अत्यंत आवश्यक है। जीवन की भागदौड़ में संघर्षों पर सफलतापूर्वक विजय प्राप्त करने के लिए तनावमुक्त जीवनशैली अपनाना समय की आवश्यकता है, ऐसा प्रेरणादायी वक्ता और लेखक प्रभु गौर गोपाल दास ने कहा। वे टेक-वारी कार्यक्रम के तहत मंत्रालय में ‘प्रभावी और तनावमुक्त जीवन’ विषय पर बोल रहे थे।
आज की दुनिया तेज़ी से डिजिटल दिशा में आगे बढ़ रही है। स्मार्टफोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरनेट जैसी तकनीकें हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे समय में टेक्नो-सेवी बनना सिर्फ आवश्यकता नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। आज विभिन्न ऑनलाइन कोर्स, मोबाइल ऐप और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से तकनीक सीखना पहले से कहीं आसान हो गया है, ऐसा उन्होंने कहा।
सीखना कभी न रोकें– जीवनभर विद्यार्थी बनें
प्रभु गौर गोपाल दास ने कहा कि सीखना एक ऐसी प्रक्रिया है जो जन्म से लेकर मृत्यु तक चलती रहती है। उम्र चाहे जो भी हो, नए कौशल सीखना, नई भाषा अपनाना या कोई शौक विकसित करना मस्तिष्क को सक्रिय बनाए रखता है। वृद्धावस्था में अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया जैसे रोगों से बचने के लिए मस्तिष्क को व्यायाम देना आवश्यक है। डिजिटल युग में यह अब और अधिक सुलभ हो गया है।
मानसिक स्वास्थ्य का रखें ध्यान
हर दिन कुछ समय स्वयं के लिए निकालें। ध्यान, पढ़ाई, खुले मन से बातचीत या अपने शौक में समय बिताएं। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद का पालन करें। ये आदतें तनाव और मानसिक विकारों से निपटने में मदद कर सकती हैं।
संस्कृति को न भूलें
संस्कृति और जीवन मूल्य हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जब हम तकनीकी प्रगति की ओर अग्रसर हैं, तब भी हमें अपनी परंपराएं और नैतिक मूल्य नहीं भूलने चाहिएं। स्मार्ट और डिजिटल बनना ज़रूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ अपने संस्कार और मूल्य भी बनाए रखना जरूरी है, ऐसा उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा। अगर मन में चलने वाले विचारों को व्यक्त नहीं किया गया तो वे मानसिक बीमारियों को आमंत्रित कर सकते हैं। इसका एक सरल उपाय है कि मन के कष्टप्रद विचारों को किसी के सामने खुलकर व्यक्त करें या उन्हें लिखकर बाहर निकालें। यह तरीका मन का बोझ हल्का करता है और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखता है। खुशहाल और संतुष्ट जीवन के लिए दूसरों से तुलना करने के बजाय खुद से तुलना करें। हमेशा इस बात पर दुखी होने की बजाय कि आपके पास क्या नहीं है, इस पर ध्यान दें कि आपके पास क्या है। इससे जीवन और अधिक समृद्ध हो जाता है, ऐसा भी उन्होंने कहा।
डिजिटल साधना भी ज़रूरी
मंत्रालय के इस मंदिर में तकनीक एक देवता के समान है और डिजिटल टेक्नोलॉजी अभंग की तरह है। आधुनिक युग में तकनीक और डिजिटल कौशल सफल भविष्य के लिए अनिवार्य हैं। इसलिए इन्हें भक्ति भाव से अपनाना चाहिए, ऐसा उन्होंने समापन में कहा।





