
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बदलापुर स्कूल यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी की हिरासत में मौत के संबंध में एफआईआर दर्ज न किए जाने पर शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार और पुलिस प्रशासन पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने इसे “बेशर्म उल्लंघन” बताते हुए चेतावनी दी कि यह आचरण आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है और यदि पालन नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और नीला गोखले की पीठ ने 7 अप्रैल को संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) लखमी गौतम को एसआईटी गठित करने और दो दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। साथ ही, जांच कर रही राज्य सीआईडी को सभी दस्तावेज सौंपने का भी आदेश दिया गया था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान गौतम ने अदालत को सूचित किया कि एसआईटी का गठन कर लिया गया है, लेकिन कागजात मिलने का इंतजार है। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “यह अदालत के आदेश का बेशर्म उल्लंघन है। यदि आदेशों का पालन नहीं किया गया तो यह कानून के शासन को नष्ट कर देगा। सीआईडी अधिकारी प्रशांत वाघुंडे ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर उन्होंने दस्तावेज नहीं सौंपे। इसके बाद अदालत ने अपर पुलिस महानिदेशक प्रशांत बर्डे को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से तलब किया। बर्डे ने आश्वस्त किया कि शाम तक सारे दस्तावेज सौंप दिए जाएंगे, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। सरकारी वकील हितेन वेनेगांवकर ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और अगली सुनवाई जल्द होने की संभावना है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक शीर्ष अदालत द्वारा कोई रोक नहीं लगाई जाती, तब तक राज्य सरकार हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है।




