
वक्फ बोर्ड के पास अकूत जमीन है। वक्फ का अर्थ है ईश्वर को दान, जैसे कुछ हिंदू अपनी जमीन, मकान किसी ट्रस्ट को दान कर देते हैं। पुराने समय में सुल्तान और बादशाह बहुतेरी जमीनें वक्फ बोर्ड को दे दी थी। भारत से पाकिस्तान जाने वाले मुसलमानों ने भी अपनी जमीन वक्फ को दे दिया था, जबकि भारतीय कानून के अनुसार पाकिस्तान जाने वाले मुसलमानों की जमीन को शत्रु संपत्ति घोषित कर दी गई है, लेकिन उस पर भी वक्फ बोर्ड काबिज बन गया। इसके विपरीत पाकिस्तान से जो हिंदू भारत आए, उसे वहां के दबंग मुसलमानों ने कब्जा कर लिया। भारत सेक्युलर राष्ट्र बना, लेकिन जिन्ना के सेक्युलर पाकिस्तान को उनके बाद कट्टर पंथियों ने इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर दिया। जिसकी अनुगूंज भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए कट्टरपंथी हिंदू संगठन प्रयत्नशील हैं। उनका तर्क है मुस्लिम आबादी बढ़ने से, जैसे अफगानिस्तान, ईरान इस्लामिक राष्ट्र बन गए, वैसे ही भविष्य में भारत भी इस्लामिक राष्ट्र बना दिया जाएगा। इस दलील में कुछ दम तो है, लेकिन भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने और मनुस्मृति लागू कर देने के बाद शूद्रों, आदिवासियों, मुसलमानों, ईसाइयों, जैनियों, बौद्धों के साथ अन्याय होगा। उन्हें गुलाम बनकर रहना होगा। मनुस्मृति के आधार पर हिंदू राष्ट्र का विरोध करने वालों का तर्क है, हिंदू राष्ट्र घोषित करने के बाद शूद्र केवल सेवक बनकर रह जाएंगे। मनुस्मृति में ब्राह्मण कन्याओं की शिक्षा पर भी रोक लगाई जा सकेगी, तो आधी आबादी महिलाएं भी चूल्हे चौके तक सीमित रह जाएंगी। वक्फ संशोधन बिल संसदीय समिति को भेजा गया था। सरकार ने वादा भी किया था कि विपक्ष के संशोधन प्रस्ताव को महत्त्व दिया जायेगा, लेकिन बहुमत के बल पर विपक्ष का एक भी संशोधन सत्ता दल ने स्वीकार नहीं किया। आशंका जाहिर की जा रही है कि बीजेपी सरकार वक्फ की जमीन छीनकर पूंजीपतियों को दे देगी। यहां वक्फ बोर्ड का काम था वक्फ प्रॉपर्टी से सैकड़ों करोड़ रुपए की आय होती है। वक्फ के उद्देश्यानुसार, उस आय से गरीब मुसलमानों की मदद करनी थी, जो शर्मयेदारों ने नहीं किया। हॉस्पिटल और शिक्षा केंद्र खोले जा सकते थे, मगर ऐसा नहीं किया गया। संभव है इसके विरोध में मुसलमान सड़क पर उतरें। यही तो बीजेपी सरकार चाहती है, ताकि उन कट्टरपंथियों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। एक बात बड़ी चालाकी से बीजेपी ने वक्फ बोर्ड का ठीकरा नीतीश कुमार, नायडू, पासवान जैसे सहयोगी दलों पर डालकर कहेगी, हमने नहीं पास किया, हमारे सहयोगियों ने कराया। तो नीतीश कुमार, नायडू, निषाद और अन्य बीजेपी सहयोगी दलों के खिलाफ मुसलमान अवश्य होंगे।
जिसका अर्थ होगा उनके दलों को एक भी मुस्लिम वोट नहीं मिलेगा। यानी चुनाव में हार सुनिश्चित है। डर तो हिंदुओं, बौद्धों, जैनियों, सिखों को भी है कि सरकार उनकी प्रॉपर्टी छीनकर अपने मित्र पूंजीपतियों को सौंप देगी। ऐसी आशंका का कारण है हसदेव जंगल अडानी को अर्पित करना, जबकि जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों का हक संवैधानिक है। लेकिन सत्ताधारी बीजेपी को संविधान से क्या लेना देना? बीजेपी के लिए हिंदुत्व के नाम पर कभी आस्था, तो कभी पाप धोने के नाम पर हिंदुओं को मूर्ख, गुलाम बनाने वाली बीजेपी सरकार के लिए मुश्किल कुछ भी नहीं है। वक्फ संशोधन को वह अपने वोट बैंक के लिए जरूर भुनाएगी। संसद में भले ही बिल पास हो गया हो, लेकिन कांग्रेस इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज जरूर करेगी। मुसलमान दो धड़े में बांटा हुआ दिख रहा है। थोड़े ही सही, मुस्लिम महिलाएं वक्फ संशोधन के पक्ष में नारे लगाते सोशल मीडिया में वायरल जरूर हुई हैं। देखना है मुसलमान सड़क पर विरोध में उतरते हैं या नहीं। अगर उतरे, तो बीजेपी का फायदा होगा। नहीं उतरे, तो उनके अहित संभव हैं। डर है कहीं यह वक्फ संशोधन बिल गृहयुद्ध का वायस न बन जाए। वैसे दोषी वक्फ बोर्ड भी कम नहीं है। अगर वह जनहित में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल बनवाए होते, तो दशा और दिशा अलग होती। लेकिन प्रभुता संपन्न मुसलमानों ने वक्फ को अपनी जागीर बना ली, जिससे वक्फ अर्थहीन हो चुका है। सरकार चाहे केंद्र की हो या राज्य सरकारें, वक्फ की पहले ही छह सौ से ऊपर जमीनें हड़प ली हैं। हां, पाकिस्तान जाने वाले लोगों की जमीनें आज़ादी के पहले जितनी थीं, उनकी बंदोबस्ती जांच कराई जानी चाहिए और उसे सरकार को शत्रु संपत्ति घोषित कर अपने कब्जे में लेनी चाहिए। हां, आज़ादी के बाद दान की गई जमीनें वक्फ को सौंपनी चाहिए। उसके लिए गाइडलाइन अवश्य घोषित की जा सकती है कि वे सारी जमीनें गरीब मुसलमानों में तकसीम कर दी जाएं। बेहतर विकल्प था सरकार के पास। पूंजीपतियों के द्वारा वक्फ बोर्ड की हड़पी जमीनों पर बनी इमारतें सरकार जब्त कर ले। बताया जाता है कि मुकेश अंबानी की बेशकीमती अट्टालिका एंटीलिया वक्फ की जमीन पर बनाई गई है। दो विकल्प हैं- या तो अंबानी की बिल्डिंग सरकार वक्फ को दे दे या फिर उसे हड़प कर सरकारी कार्यालय बना दे और उतनी ही जमीन सरकार कहीं वक्फ बोर्ड को दे दे। आरोप लगाए जा रहे हैं कि मुकेश अंबानी की अट्टालिका एंटीलिया बचाने के लिए ही सरकार ने वक्फ संशोधन बिल लाया है। यदि यह आरोप सही है, तो अंटालिया का सरकार तुरंत अधिग्रहण कर ले। शक और सुभा सरकार की मंशा पर उठती है। यदि एंटीलिया बचाने के लिए ही सरकार ने संशोधन बिल पारित कराया है, तो यह अन्याय होगा। किसी की जमीन सरकार अपने उपयोगी फौजी और अन्य कारकों के लिए ले सकती है, तो एंटीलिया का तुरंत अधिग्रहण कर ले सरकार। वर्ना यह संदेश जाएगा कि बीजेपी सरकार मुसलमानों को प्रताड़ित कर रही है। यदि उसकी अनुगूंज पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की जमीन छीन सकती है।




