
डी वार्ड के भ्रष्ट डीओ दिलीप अहिरे पर मेहरबान अश्विनी जोशी
मुंबई। मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) अब एक भ्रष्टाचार मार्केटिंग कंपनी बन गई है, जहां बिना लूट-खसोट और बेईमानी के कोई काम नहीं होता। यहां सिपाही से लेकर आयुक्त तक सभी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, लेकिन ईमानदारी का चोला पहनकर बैठते हैं। गरीबों को लूटने वाले ये अधिकारी अवैध काम करने वालों के इशारों पर नाचते हैं। बीएमसी में अवैध निर्माण का खेल बिना नियम-कानून की परवाह किए खुलेआम चलता है। डी विभाग का कार्यकारी अभियंता व पदनिर्देशित अधिकारी (डीओ) दिलीप संतोष अहिरे इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 19 अप्रैल 2021 से सहायक अभियंता के रूप में तैनात अहिरे ने 1 जुलाई 2022 को डी वार्ड में ही टेंडर भरकर कार्यकारी अभियंता का पद हासिल कर लिया। सवाल यह है कि किस नियम के तहत उसकी पोस्टिंग उसी वार्ड में हुई? क्या अति-आयुक्त अश्विनी जोशी इस पर कोई कार्रवाई करेंगी या फिर उन्हें भी भ्रष्टाचार का आशीर्वाद प्राप्त है? अहिरे और उसकी पूरी टीम अवैध निर्माण को बढ़ावा देने में लगी हुई है। बीएमसी में नगर अभियंता का कार्यालय अब दलालों और बिल्डर माफियाओं की शरणस्थली बन चुका है। अधिकारी बंद कमरों में बैठकर वसूली करते हैं, लेकिन आम नागरिकों से मिलने से कतराते हैं। नगर अभियंता और डायरेक्टर मिलकर पोस्टिंग और ट्रांसफर का खेल खेलते हैं, जिसमें सिर्फ पैसा चलता है। आज बीएमसी पूरी तरह भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी है। अति-आयुक्त अश्विनी जोशी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस लूट में सबसे आगे हैं। यही वजह है कि मुंबई के प्रत्येक वार्ड में जेई, एसई और एई की नियुक्ति बिना टेंडर के नहीं होती। बीएमसी अब शहर की सेवा करने के बजाय नागरिकों का खून चूसने वाली संस्था बन गई है। ऐसे भ्रष्टाचारियों को शर्म आनी चाहिए, जो जनता की गाढ़ी कमाई को लूटकर अपनी जेबें भर रहे हैं। मुंबई के नागरिकों को इस लूट के खिलाफ आवाज उठानी होगी, वरना बीएमसी का यह भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं होगा।




