
मुंबई। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने अपने दिवंगत पति की वसीयत में जालसाजी करने की आरोपी 61 वर्षीय महिला को जमानत दे दी है और कहा है कि उसकी गिरफ्तारी और हिरासत “अनुचित” थी। न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव ने 29 मार्च, शनिवार देर शाम को 70 वर्षीय महिला की जमानत याचिका पर सुनवाई की, जिस दिन अदालत की छुट्टी थी। अदालत ने उसे व्यक्तिगत मुचलके पर जोर दिए बिना “तुरंत” रिहा करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट, हेमलता शाह द्वारा अधिवक्ता रिया सिंकर के माध्यम से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और अन्य बीमारियों से पीड़ित शाह को 28 मार्च की शाम 6 बजे गिरफ्तार किया गया था, एक दिन पहले मजिस्ट्रेट द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। शाह के दिवंगत पति के पूर्व व्यापारिक साझेदार ने आपराधिक साजिश और वसीयत में जालसाजी का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला ने अपने पति की संपत्तियों पर दावा करने के लिए उनकी वसीयत में हेरफेर किया।न्यायमूर्ति जाधव ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि उच्च न्यायालय ने 27 नवंबर, 2020 को इस वसीयत की पुष्टि की थी। अदालत ने वसीयत के प्रमाणित होने के बावजूद शिकायत दर्ज कराने में पूर्व साझेदार की “स्थिति” (अदालत में कानूनी अधिकार) पर भी सवाल उठाया। साथ ही, मजिस्ट्रेट द्वारा मामले की सुनवाई और वारंट जारी करने की “तत्परता” पर भी सवाल उठाते हुए इसे “चौंकाने वाला” करार दिया। न्यायमूर्ति जाधव ने कहा, वर्तमान मामले में गैर-जमानती वारंट जारी करने को लेकर निचली अदालत की तत्परता प्रथम दृष्टया असामान्य लगती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मजिस्ट्रेट को जालसाजी के मुद्दे पर ध्यान नहीं देना चाहिए था, क्योंकि वसीयत को 2020 में उच्च न्यायालय द्वारा प्रमाणित किया जा चुका था। महिला की तत्काल रिहाई का आदेश देते हुए अदालत ने कहा, मेरे विचार से, उपरोक्त तथ्यों के आधार पर आवेदक की हिरासत पूरी तरह से अनुचित है। हालांकि, अदालत ने महिला को अंतरिम जमानत देते हुए उसे पुलिस जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। मजिस्ट्रेट ने 27 मार्च को गैर-जमानती वारंट जारी किया था। शाह को 28 मार्च को शाम 6 बजे गिरफ्तार किया गया और रात 10:24 बजे रिमांड के लिए पेश किया गया। पुलिस द्वारा रिमांड मांगे बिना ही मजिस्ट्रेट ने उसे एक दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। अगले दिन उसे फिर से पेश किया गया, जब उसे 11 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और उसकी जमानत खारिज कर दी गई। इसके बाद, शाह के वकीलों ने तुरंत हाईकोर्ट का रुख किया, जिस पर छुट्टी के दिन शाम 6:40 बजे न्यायमूर्ति जाधव ने सुनवाई की और महिला को जमानत दे दी।




