
मुंबई। गोरेगांव स्थित आरे मिल्क कॉलोनी के आदिवासी गांवों के निवासियों ने शुक्रवार को डेयरी विभाग के कार्यालय तक मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन मयूर नगर-जीवचपड़ा में 30 से 35 दुकानों को तोड़े जाने के खिलाफ किया गया। डेयरी विभाग द्वारा खाने-पीने की चीजें बेचने वाली इन दुकानों को नष्ट कर दिया गया। इनमें से अधिकांश दुकानें आदिवासी परिवारों की थीं, हालांकि कुछ पर अतिक्रमणकारियों का भी कब्जा था। प्रदर्शनकारियों ने वन अधिकार अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि वे कानूनी रूप से संरक्षित हैं और उनके अधिकारों का हनन हुआ है।
बिना पूर्व सूचना तोड़ी गईं दुकानें
जीवचपाड़ा निवासी नंदू वर्ते ने कहा, आदिवासी परिवार अधिकतर अशिक्षित हैं और खेती तथा छोटी दुकानें ही हमारी आय का स्रोत हैं। हमें शुक्रवार को नोटिस दिया गया, लेकिन जवाब देने से पहले ही हमारी दुकानें तोड़ दी गईं।
आरे कॉलोनी में आदिवासी समुदायों का अस्तित्व
आरे कॉलोनी जो संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के बफर ज़ोन सहित 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है, में 27 आदिवासी बस्तियाँ स्थित हैं। यहां वारली, मल्हार कोली और कोकना समुदायों के 10,000 से अधिक लोग निवास करते हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में झुग्गियों में अतिक्रमणकारियों की संख्या भी बढ़ रही है। डेयरी विकास विभाग ने प्रदर्शनकारियों से मंगलवार को उनकी शिकायतें सुनने और बातचीत करने की सहमति दी है।




