
मुंबई। 122 करोड़ रुपये के न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में एक अहम घटनाक्रम में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने झारखंड के बोकारो से राजीव रंजन पांडे उर्फ पवन गुप्ता को गिरफ्तार किया है। 45 वर्षीय पांडे इस बड़े वित्तीय घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए आठवें व्यक्ति हैं। शनिवार को मुंबई लाए जाने के बाद उसे एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया, जिसने उसे 28 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
अरुणाचलम से पांडे को 15 करोड़ रुपये का ट्रांसफर
ईओडब्ल्यू के सूत्रों के मुताबिक, एक अन्य आरोपी अरुणाचलम ने मुख्य आरोपी हितेश मेहता से प्राप्त 40 करोड़ रुपये की बड़ी रकम में से पांडे को 15 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। जांचकर्ताओं ने पाया कि पांडे अपने तीन सहयोगियों के साथ झारखंड से मुंबई आया था और आकर्षक रिटर्न का वादा करके अरुणाचलम को अपने व्यवसाय में निवेश करने के लिए राजी किया था। अरुणाचलम ने पांडे पर भरोसा कर 15 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। अब ईओडब्ल्यू उन तीन अन्य व्यक्तियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने इस धोखाधड़ी वाली निवेश योजना में भूमिका निभाई थी।
मुख्य आरोपी हितेश मेहता का ब्रेन मैपिंग टेस्ट
ईओडब्ल्यू ने हितेश मेहता का 28 मार्च को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) में ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने का फैसला किया है। इससे पहले 11 मार्च को उसका झूठ पकड़ने वाला परीक्षण (पॉलीग्राफ टेस्ट) किया गया था, जिसके कथित रूप से नकारात्मक परिणाम आए थे। अधिकारियों के अनुसार, पॉलीग्राफ टेस्ट केवल पूर्वनिर्धारित प्रश्नों के सेट तक सीमित होता है, जबकि ब्रेन मैपिंग टेस्ट ज्यादा गहन विश्लेषण की सुविधा देता है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि यह उन्नत तकनीक घोटाले में इस्तेमाल किए गए पैसों और इसमें शामिल व्यक्तियों के नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण सुराग देगी।जावेद आजम की भूमिका और बिहार में छापेमारी की तैयारी
जांच में यह भी सामने आया है कि भाजपा नेता हैदर आजम के भाई और पहले से गिरफ्तार संदिग्ध जावेद आजम ने अरुणाचलम से मिले 15 करोड़ रुपये का इस्तेमाल अपने इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसाय को बढ़ाने के लिए किया। अधिकारियों ने पाया कि जावेद ने इस पैसे से बिहार में “डिजिटल दुनिया” ब्रांड के तहत 11 इलेक्ट्रॉनिक स्टोर खोले। पूछताछ के दौरान जावेद ने निवेश की बात स्वीकार कर ली है। इस खुलासे के बाद EOW की एक टीम अगले हफ़्ते बिहार जाकर जावेद की धोखाधड़ी से हुई कमाई से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने की योजना बना रही है।
डकैती और घोटाले का कनेक्शन
घोटाले के उजागर होने से पहले अरुणाचलम के अंधेरी स्थित कार्यालय में कथित तौर पर डकैती हुई थी, जिसमें भारी मात्रा में नकदी – जो कि गबन किए गए धन का एक हिस्सा थी – चोरी हो गई थी। हालांकि, न तो अरुणाचलम और न ही जावेद ने इस चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, क्योंकि उन्हें डर था कि घटना का खुलासा करने से उनकी अवैध गतिविधियों पर से पर्दा उठ जाएगा। EOW अब इस डकैती की जांच कर रही है और इसके पीछे की साजिश का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
आगे की जांच में फोकस
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, EOW वित्तीय लेन-देन पर पैनी नज़र रख रही है और धोखाधड़ी से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारी आरोपियों से पूछताछ तेज कर रहे हैं और उनके द्वारा अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की जब्ती की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच, मुख्य आरोपी हितेश मेहता के ब्रेन मैपिंग टेस्ट के नतीजे जांच की दिशा में अहम मोड़ ला सकते हैं। EOW ने संकेत दिया है कि इस घोटाले के तार और भी गहरे हो सकते हैं, और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और खुलासे हो सकते हैं।




