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गडचिरोली के 40 हजार बंगाली नागरिकों को मिलेगा जमीन का पूर्ण मालिकाना हक, 21 हजार 824 एकड़ भूमि का वर्षों पुराना मामला सुलझा

मुंबई। गडचिरोली जिले में बंगाली समाज के नागरिकों को पुनर्वास कानून के तहत मिली जमीन से जुड़ा वर्षों पुराना मामला आखिरकार सुलझने जा रहा है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इन नागरिकों को आवंटित जमीनों को भोगवटादार वर्ग-2 से वर्ग-1 में परिवर्तित कर पूर्ण मालिकाना हक देने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को विधान भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में राजस्व मंत्री बावनकुले ने इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए। राज्य सरकार के इस नीतिगत निर्णय से गडचिरोली जिले की कुल 21 हजार 824 एकड़ जमीन से जुड़ा मामला स्थायी रूप से हल होगा और करीब 40 हजार बंगाली नागरिकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इस निर्णय से बंगाली समाज के नागरिकों को वर्षों बाद अपनी जमीन पर पूर्ण मालिकाना अधिकार मिल सकेगा।
10 हजार घर होंगे नियमित, गांवठाण की जमीन मिलेगी नि:शुल्क
गडचिरोली जिले में बंगाली समाज के करीब 10 हजार घरों को नियमित करने के लिए तत्काल आधिकारिक प्रस्ताव भेजने के निर्देश राजस्व मंत्री ने प्रशासन को दिए हैं। विशेष रूप से संबंधित गांवठाण की जमीनों को पूरी तरह नि:शुल्क नियमित किया जाएगा। इससे दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले हजारों गरीब परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
8 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से नियमित होगी कृषि भूमि
पुनर्वास क्षेत्र की 1,200 एकड़ कृषि भूमि को तत्काल नियमित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। रेडी रेकनर की 25 प्रतिशत दर के अनुसार कृषि भूमि के लिए 8 हजार रुपये प्रति एकड़ का भुगतान करने की तैयारी बंगाली समाज के नागरिकों ने स्वयं दिखाई है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने संबंधित जिला प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को इस पूरी प्रक्रिया से जुड़ा कानूनी और तकनीकी प्रस्ताव बिना किसी देरी के राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
40 हजार नागरिकों के जीवन में आएगा बड़ा बदलाव
पुनर्वास कानून के तहत आवंटित जमीनों को ‘वर्ग-2’ का दर्जा प्राप्त होने के कारण बंगाली समाज के नागरिकों को जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक से कर्ज लेने और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की पहल पर लिए गए इस निर्णय से करीब 40 हजार नागरिकों की वर्षों पुरानी समस्या दूर होने का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासन को इस संबंध में प्रस्ताव युद्धस्तर पर तैयार कर अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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