
मुंबई। बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाए गए 100 दिनों के विशेष जनजागरूकता अभियान के दौरान 180 संभावित बालविवाह के मामलों की पहचान कर उन्हें रोका गया। साथ ही समय पर हस्तक्षेप कर 6 बालविवाह रोकने में सफलता मिली। यह जानकारी राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने दी। अक्टूबर महीने में शुरू हुए इस अभियान का समापन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर किया गया। यह पहल वर्ष 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को मजबूत करने वाली साबित हुई। इस अभियान के क्रियान्वयन में मुंबई जिला और मुंबई उपनगर जिला महिला एवं बाल विकास कार्यालयों ने संयुक्त रूप से काम किया। महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रतिबद्ध सामुदायिक विकास ट्रस्ट (सीसीडीटी) को इस अभियान की नोडल एजेंसी नियुक्त किया था। संस्था के समन्वय से विभिन्न स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रम और बालविवाह रोकने के लिए कई प्रतिबंधात्मक उपाय किए गए। अभियान के तहत ‘बालविवाह मुक्ति रथ’ मुंबई, मुंबई उपनगरीय और पुणे जिलों की शहरी झोपड़पट्टियों, ग्रामीण तथा आदिवासी क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को जागरूक करता रहा। इसके माध्यम से बालविवाह के दुष्परिणाम, लड़कियों के अधिकार और शिक्षा के महत्व के बारे में व्यापक जनजागृति की गई। इस दौरान चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन की हेल्पलाइन 1098 का भी सक्रिय सहयोग रहा। साथ ही समुदाय के सदस्य, फ्रंटलाइन वर्कर्स और स्थानीय भागीदारों ने भी अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई। यह जानकारी मंगलवार को मुंबई जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शोभा शेलार ने दी। अधिकारियों के अनुसार इस अभियान से समाज में जागरूकता बढ़ी है और बालविवाह के खिलाफ सामूहिक प्रयासों को नई मजबूती मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि हर लड़की को शिक्षा, सम्मान और सुरक्षित भविष्य देने के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर प्रयास करना आवश्यक है। 2030 तक बालविवाहमुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




