सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर सालभर रोक, बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोहराया आदेश
कोर्ट ने कहा— जश्न सार्वजनिक स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं हो सकता, साफ हवा अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में सार्वजनिक सड़कों और रास्तों पर पटाखे फोड़ने पर सालभर लागू प्रतिबंध को दोहराते हुए कहा है कि बेरोकटोक जश्न शहरी इलाकों को “ज़हरीले गैस चैंबर” में बदल रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उत्सव मनाने का अधिकार नागरिकों के स्वास्थ्य और स्वच्छ हवा के अधिकार से ऊपर नहीं हो सकता। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने मुंबई, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई और कल्याण-डोंबिवली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि मानसून के बाद प्रदूषण का स्तर पहले से ही गंभीर रहता है और पटाखों का धुआं स्थिति को और खराब कर सकता है। पीठ ने कहा कि औद्योगीकरण, निर्माण कार्य, बेकरी और छोटी विनिर्माण इकाइयों सहित कई स्रोतों से प्रदूषण फैल रहा है। ऐसे में पटाखों से निकलने वाला अतिरिक्त धुआं नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है।
साफ हवा भी जीवन के अधिकार का हिस्सा
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। कोई भी व्यक्ति अपने उत्सव के नाम पर दूसरे नागरिकों को इस अधिकार से वंचित नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि जश्न मनाया जा सकता है, लेकिन ऐसा करते समय हजारों नागरिकों के स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकारों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
राज्य ने पूर्ण प्रतिबंध का किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा कि मौजूदा कानूनों और नियमों के जरिए इनके इस्तेमाल को नियंत्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी आबादी वाले शहर में हर व्यक्ति की गतिविधि पर निगरानी रखना प्रशासन के लिए व्यावहारिक रूप से कठिन है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि 22 सितंबर 2026 को जारी उसके पहले के निर्देश पूरे वर्ष आने वाले त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों पर लागू रहेंगे। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अदालतों के आसपास घोषित साइलेंस जोन में भी नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।
शिकायत व्यवस्था और नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश
हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्थानीय निकायों और पुलिस को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर शिकायत दर्ज कराने की प्रभावी व्यवस्था तैयार करें और नोडल अधिकारी नियुक्त करें। इसके साथ ही शोर प्रदूषण की निगरानी के लिए फील्ड अधिकारियों को डेसिबल मीटर उपलब्ध कराने और नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाने को कहा गया है। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि जनजागरूकता अभियानों में प्रसिद्ध हस्तियों को शामिल किया जा सकता है। पटाखा विक्रेताओं से भी कम शोर और कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखों को बढ़ावा देने की अपील की गई है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी, जिसमें अदालत अपने निर्देशों के पालन की स्थिति की समीक्षा करेगी।
