महाराष्ट्र में दो नए वन्यजीव अभयारण्यों को मंजूरी, 14 संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों के प्रस्ताव भी स्वीकृत
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में राज्य वन्यजीव मंडल की बैठक, रानभैंसों के संरक्षण के लिए कोलामार्का को अभयारण्य बनाने का निर्णय

मुंबई। महाराष्ट्र में वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य वन्यजीव मंडल की 26वीं बैठक में गढ़चिरौली जिले के कोलामार्का संरक्षण आरक्षित क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने तथा तानसा वन्यजीव अभयारण्य के पास नए विस्तारित तानसा वन्यजीव अभयारण्य को घोषित करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही पुणे, रायगढ़, नासिक, नंदुरबार, ठाणे, पालघर और चंद्रपुर जिलों के 14 संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों के प्रस्ताव भी स्वीकृत किए गए। बैठक में वन मंत्री गणेश नाईक दूरदृश्य प्रणाली के माध्यम से शामिल हुए। वन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय खंदारे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एम. श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्रीनिवास रेड्डी, मंडल के सदस्य एवं मित्रा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीण परदेशी सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
रानभैंसों के संरक्षण पर जोर
गढ़चिरौली जिले का कोलामार्का क्षेत्र रानभैंसों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। तानसा वन्यजीव अभयारण्य को मानव-विहीन बनाने की योजना के तहत ओगदा, खोडदे, तिरमाल, पाचघर, फणसाड और आमले गांवों की 588.767 हेक्टेयर राजस्व एवं निजी भूमि को नए विस्तारित तानसा वन्यजीव अभयारण्य में शामिल करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली।
सात जिलों के 14 संरक्षण आरक्षित क्षेत्र मंजूर
बैठक में जिन 14 संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, उनमें पुणे और रायगढ़ जिलों का वेल्हे-मुलशी, पुणे का भोरगिरीगढ़, नासिक के दिंडोरी, सुरगना और ताहराबाद, नंदुरबार का चिंचपाड़ा, रायगढ़ के अलीबाग और घेरा मानिकगढ़, पुणे-रायगढ़ का लोनावला, ठाणे का गुमतारा, पालघर के जव्हार, आशेरीगढ़ और धामणी तथा चंद्रपुर का एकारा शामिल हैं। इसके अलावा कोका वन्यजीव अभयारण्य के 100.139 वर्ग किलोमीटर और जायकवाड़ी पक्षी वन्यजीव अभयारण्य के 255.79 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को संकटग्रस्त वन्यजीव आवास घोषित करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
बांधों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं पर निर्देश
मुख्यमंत्री फडणवीस ने निर्देश दिया कि अभयारण्यों में बांधों की मरम्मत, पुनर्वास और गाद निकालने जैसे नियमित कार्य संबंधित प्रबंधन योजनाओं में शामिल किए जाएं। नियमों के अनुरूप मानक कार्यप्रणाली तैयार कर तीन महीने के भीतर प्रबंधन योजनाओं में जरूरी बदलाव किए जाएं। इन कार्यों के लिए हर बार अलग मंजूरी लेने के बजाय संबंधित वन्यजीव अधिकारियों को पूर्व सूचना देने की व्यवस्था की जाए। बैठक में संरक्षित क्षेत्रों, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों और बाघ गलियारों में सिंचाई, स्वास्थ्य, जलापूर्ति, पुल, सड़क, भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर और बिजली लाइनों सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
मानव-वन्यजीव संघर्ष और पुनर्वास पर चर्चा
राज्य के छह बाघ परियोजना क्षेत्रों के कोर, बफर और अधिसूचित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों को शांत क्षेत्र घोषित करने, मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्राकृतिक आपदा का दर्जा देने तथा बाघ परियोजनाओं के बफर क्षेत्रों में इच्छुक गांवों के पुनर्वास के लिए नीति बनाने के प्रस्तावों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन कानून के तहत जिलाधिकारियों की जिम्मेदारी, मौजूदा मुआवजा व्यवस्था और वन विभाग के अधिकारों के बीच तालमेल की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई की जाए। इसके अलावा जिन क्षेत्रों को पहले ही अभयारण्य घोषित किया जा चुका है, लेकिन जो अब तक क्षेत्रीय वन विभाग या वन विकास निगम के प्रबंधन में हैं, उन्हें वन्यजीव शाखा को सौंपने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के समायोजन, प्रतिनियुक्ति और रिक्त पदों का अध्ययन कर एक महीने के भीतर निर्णय के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
