MMRDA प्रोजेक्ट से धूल, गड्ढे या ट्रैफिक जाम की परेशानी? अब 24×7 टोल-फ्री नंबर पर करें शिकायत

‘सुरक्षा एवं प्रतिक्रिया समन्वय केंद्र’ शुरू, शिकायत दर्ज होने से समाधान तक होगी निगरानी, लापरवाह ठेकेदारों के प्रदर्शन पर भी नजर

मुंबई। मुंबई महानगर प्रदेश में एमएमआरडीए की मेट्रो, फ्लाईओवर, सड़क या अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के कारण यदि नागरिकों को धूल, ट्रैफिक जाम, खराब बैरिकेडिंग, गड्ढों या सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तो अब वे सीधे एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष में अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने इसके लिए समर्पित ‘सुरक्षा एवं प्रतिक्रिया समन्वय केंद्र’ (SRCC) शुरू किया है। नागरिकों की सुविधा के लिए एमएमआरडीए ने 24×7 टोल-फ्री नंबर 1800-22-8801 जारी किया है। इस नंबर पर एमएमआरडीए की परियोजनाओं से जुड़ी समस्या, असुविधा या सुरक्षा संबंधी शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी। नई व्यवस्था के तहत नागरिकों की शिकायतों को सीधे एमएमआरडीए की संबंधित परियोजना टीमों, इंजीनियरों, ठेकेदारों, सलाहकारों और संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाया जाएगा। शिकायत मिलते ही कंट्रोल रूम उसे दर्ज करेगा और उसकी प्रकृति तथा गंभीरता के आधार पर संबंधित फील्ड टीम को भेजेगा। तत्काल सुरक्षा हस्तक्षेप वाले मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायत केवल संबंधित विभाग को भेजकर मामला खत्म नहीं माना जाएगा। समस्या का उचित समाधान होने और शिकायत बंद होने तक SRCC उसकी निगरानी करता रहेगा। पूरी प्रक्रिया शिकायत दर्ज करने, आकलन, सत्यापन, प्रतिक्रिया, निगरानी और समाधान के निर्धारित चरणों के आधार पर संचालित होगी। परियोजनाओं में जवाबदेही और काम की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए विशेष ‘SRCC डैशबोर्ड’ भी तैयार किया गया है। इसके जरिए वरिष्ठ अधिकारी प्रतिदिन शिकायतों के रुझान, लंबित मामलों और ठेकेदारों के प्रदर्शन की निगरानी कर सकेंगे। इससे बार-बार सामने आने वाली कमियों और काम में देरी करने वाले ठेकेदारों की पहचान करने में भी मदद मिलेगी। एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी ने कहा कि मुंबई महानगर क्षेत्र में जिस बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का काम चल रहा है, उसी अनुपात में प्रतिक्रिया व्यवस्था का मजबूत होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि SRCC का उद्देश्य त्वरित प्रतिक्रिया, प्रभावी समाधान और प्रत्येक शिकायत से मिले अनुभव के आधार पर दूसरी परियोजनाओं में भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना है। ‘सत्यापन, प्रतिक्रिया और समाधान’ के आधार पर काम करने वाला यह केंद्र परियोजना स्थलों के आसपास रहने वाले नागरिकों और वहां से गुजरने वाले लोगों की शिकायतों के निपटारे के लिए एकल व्यवस्था के रूप में काम करेगा।

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