विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में बैंकों और वित्तीय संस्थानों की भूमिका निर्णायक: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

मुंबई में एसोचैम के 21वें वार्षिक बैंकिंग एवं वित्तीय सम्मेलन में राज्यपाल ने कहा— ग्रामीण परिवारों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों को मिले सस्ता ऋण और वित्तीय सुविधाओं का लाभ

मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि बैंक और वित्तीय संस्थान राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। उद्योगों को वित्तीय सहायता और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आर्थिक सहयोग देकर ये संस्थान रोजगार सृजन तथा समावेशी विकास को गति प्रदान करते हैं। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में देश के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की भूमिका निर्णायक होगी। शुक्रवार को राज्यपाल वर्मा मुंबई के वर्ली में एसोचैम द्वारा आयोजित बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र की ऋण प्रदाता संस्थाओं के 21वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति के लिए वित्तीय सेवाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री जनधन योजना, आधार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) जैसी पहलों से देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है। हालांकि, ग्रामीण परिवारों, वंचित वर्गों और छोटे उद्यमियों को किफायती ऋण, बीमा तथा पेंशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अभी और प्रयास करने की आवश्यकता है।त्रिपुरा में महिला स्वयं सहायता समूहों के अनुभवों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक क्षमताओं पर विश्वास कर उन्हें पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने से परिवारों की आय बढ़ने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समय पर और किफायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि कृषि, बुनियादी ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रामीण उद्योगों के विकास के लिए वित्तीय संस्थानों को नए और प्रभावी वित्तपोषण विकल्प विकसित करने चाहिए। महाराष्ट्र में स्टार्टअप और नवाचार आधारित उद्योगों की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल वर्मा ने कहा कि नए उद्यमों को पूंजी, लचीली ऋण सुविधाएं और ऋण गारंटी उपलब्ध कराकर प्रोत्साहित किया जा सकता है। बैंकों, उद्योगों, विश्वविद्यालयों, इनक्यूबेटरों और सरकारी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से नए विचारों को प्रतिस्पर्धी व्यावसायिक उद्यमों में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक राजधानी के रूप में मुंबई का विशेष महत्व है। महाराष्ट्र में विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी, शहरी विकास और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में वित्तीय संस्थानों के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तकनीकी बदलावों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, ग्राहक संरक्षण और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय प्रौद्योगिकी के विस्तार के साथ ग्राहकों की सुरक्षा तथा वित्तीय लेनदेन में विश्वास बनाए रखना भी जरूरी है। राज्यपाल वर्मा ने केंद्र और राज्य सरकारों, नियामक संस्थाओं, बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) तथा फिनटेक क्षेत्र से आपसी समन्वय के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित, नवाचार आधारित और समावेशी वित्तीय व्यवस्था विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। सम्मेलन के दौरान राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली संस्थाओं एवं व्यक्तियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने स्वागत भाषण में कहा कि बुनियादी ढांचे का विकास, विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार, डिजिटलीकरण, उद्यमिता और कारोबार में सुगमता जैसे क्षेत्रों में हो रहे प्रयास विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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