वैजापुर-गंगापुर के 200 गांवों में जलसंकट से निपटने के लिए तत्काल उपाय करें: मंत्री गुलाबराव पाटील
टैंकरों पर निर्भरता 30 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य, मराठवाड़ा वाटर ग्रिड और जलजीवन मिशन के अधूरे कार्य युद्धस्तर पर पूरे करने के निर्देश

मुंबई। महाराष्ट्र के जलापूर्ति मंत्री गुलाबराव पाटील ने वैजापुर और गंगापुर विधानसभा क्षेत्रों में पानी की किल्लत को देखते हुए गांववार समीक्षा कर तत्काल आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हर गांव में सीधे टैंकर शुरू करने के बजाय कुओं का अधिग्रहण, क्षैतिज बोरिंग, पुरानी जलापूर्ति योजनाओं की मरम्मत और उपलब्ध जलस्रोतों के प्रभावी उपयोग को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही मराठवाड़ा वाटर ग्रिड और जलजीवन मिशन के अंतर्गत अधूरे कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए। मंगलवार को मंत्रालय में वैजापुर और गंगापुर विधानसभा क्षेत्रों में जलसंकट, टैंकरों से जलापूर्ति और विभिन्न जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधायक प्रा. रमेश बोरनारे, जलापूर्ति विभाग के संबंधित अधिकारी तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में बताया गया कि वैजापुर-गंगापुर क्षेत्र के लगभग 200 गांवों के लिए तीन महीने की जलसंकट कार्ययोजना तैयार की गई है। इसमें बड़ी संख्या में टैंकरों की आवश्यकता दर्शाई गई है। हालांकि मंत्री पाटील ने स्पष्ट किया कि टैंकरों की मांग मंजूर करने से पहले प्रत्येक गांव की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया जाए और वैकल्पिक उपायों की व्यवहार्यता जांची जाए। उन्होंने कहा कि उचित नियोजन और स्थानीय जलस्रोतों के प्रभावी उपयोग से टैंकरों की संख्या कम से कम 30 प्रतिशत तक घटाई जा सकती है। इसके लिए गांववार कुओं का अधिग्रहण, क्षैतिज बोरिंग, पुरानी जलापूर्ति योजनाओं की मरम्मत तथा उपलब्ध कुओं और पानी की टंकियों के उपयोग की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। बैठक में मराठवाड़ा वाटर ग्रिड योजना के अंतर्गत वैजापुर और गंगापुर तहसीलों के सूखाग्रस्त गांवों तक पानी पहुंचाने के लिए चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। योजना की पाइपलाइन, जलशुद्धीकरण केंद्र, मुख्य जलवाहिनी, ऊंची पानी की टंकियों (ईएसआर) और एमबीआर से संबंधित कार्य निर्धारित समय में पूरे करने पर जोर दिया गया। समीक्षा के दौरान सामने आया कि कुछ स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा होने के बावजूद गांवों को वास्तविक जल कनेक्शन नहीं मिल पाया है। वहीं, पानी की टंकियों के निर्माण की धीमी गति, एमबीआर के अधूरे कार्य और रेलवे क्रॉसिंग से संबंधित लंबित कार्यों के कारण जलापूर्ति प्रभावित हो रही है। मंत्री पाटील ने संबंधित ठेकेदारों और अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य पूरे कर जल्द से जल्द गांवों तक पानी पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि जलशुद्धीकरण केंद्र का निर्माण पूरा होने में समय लग रहा है, तो तकनीकी रूप से सुरक्षित और व्यवहार्य वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से नागरिकों को अस्थायी जलापूर्ति उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाशी जाएं। पुरानी जल वितरण व्यवस्था की टंकियों और पाइपलाइनों को आवश्यकतानुसार आपस में जोड़कर उपयोग करने पर भी विचार किया जाए, ताकि टैंकरों की संख्या और उन पर होने वाला खर्च कम किया जा सके। जलजीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण बताई गई योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जांच करने के भी निर्देश दिए गए। मंत्री पाटील ने कहा कि केवल कागजों पर कार्य पूरा दिखाने के बजाय गांवों में वास्तविक नल कनेक्शन, पानी की उपलब्धता और योजनाओं की कार्यक्षमता की पुष्टि की जाए। अधूरे कार्यों, निधि की कमी और ठेकेदारों के लंबित भुगतान से संबंधित समस्याओं की समीक्षा कर योजनाओं को जल्द पूरा किया जाए। जलसंकट कार्ययोजना की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए विधायक, उपअभियंता, खंड विकास अधिकारी और तहसीलदार की उपस्थिति में संयुक्त बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए। इस बैठक में प्रत्येक गांव में उपलब्ध पानी, आवश्यक उपायों, लंबित कार्यों और उन्हें पूरा करने की समयसीमा तय की जाएगी। मंत्री पाटील ने विशेष रूप से उन जलापूर्ति योजनाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए, जिनका 75 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं को तत्काल पूरा करने से कई गांवों को शीघ्र जलापूर्ति उपलब्ध कराई जा सकती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलसंकट के दौरान नागरिकों को राहत पहुंचाने के लिए उपलब्ध जलस्रोतों का अधिकतम उपयोग किया जाए। साथ ही अधूरी योजनाओं को पूरा करने, गांववार नियोजन और नियमित समीक्षा के माध्यम से जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए।
