आयुष्मान योजना में अनियमितताओं पर सख्ती, लखनऊ और गोंडा के 21 निजी अस्पतालों को नोटिस
मरीजों से अवैध वसूली, इलाज के पैकेज में हेरफेर और चिकित्सा सुविधाओं में कमी का मामला, सूचीबद्धता समाप्त करने और वित्तीय वसूली की चेतावनी

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत इलाज में अनियमितता करने वाले निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) की टीमों ने मंगलवार को लखनऊ और गोंडा के कुल 21 सूचीबद्ध निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान मरीजों से अतिरिक्त पैसे वसूलने, इलाज के पैकेज में हेरफेर करने और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद संबंधित अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। साचीज की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप आयुष्मान योजना का लाभ पात्र गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने तथा निर्धारित नियमों के अनुसार बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के इलाज उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को लखनऊ के छह निजी अस्पतालों चंद्रावती हॉस्पिटल, दुबे जी हॉस्पिटल, जीवक हॉस्पिटल, काइंड हॉस्पिटल, मेडलाइफ रिसर्च एंड ट्रॉमा सेंटर और एसआर हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान अस्पतालों के रिकॉर्ड, मरीजों के बयान और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जांच की गई। जांच में कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें सामान्य बीमारी से पीड़ित मरीजों को अस्पताल के रिकॉर्ड में आईसीयू और एचडीयू में भर्ती दिखाया गया था। साचीज के अनुसार, अधिक भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से इलाज के पैकेज में हेरफेर किए जाने की आशंका सामने आई है। इसके अलावा आयुष्मान योजना के तहत इलाज पूरी तरह कैशलेस होने के बावजूद कुछ मरीजों और उनके तीमारदारों से नकद पैसे लेने की शिकायतें भी मिलीं। निरीक्षण के दौरान ड्यूटी रोस्टर में गड़बड़ी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति और गंभीर मरीजों के इलाज के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी भी पाई गई। इसी प्रकार गोंडा जिले के 15 निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। इनमें सुधा न्यूरो एंड ट्रॉमा सेंटर, एपेक्स हॉस्पिटल, कृष्णा केयर सेंटर, जीवन दीप हॉस्पिटल, गायत्री हॉस्पिटल, सनराइज हॉस्पिटल ऑर्थो एंड मैटरनिटी सेंटर, किरण हॉस्पिटल, फैमिली हॉस्पिटल, लाइफ लाइन हॉस्पिटल, मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड, नूर हॉस्पिटल, कृष्णा हॉस्पिटल, श्री कृष्ण कुमार मौर्य मेमोरियल लाइफ केयर हॉस्पिटल, नारायण हॉस्पिटल एंड कैंसर रिसर्च सेंटर और अवध हॉस्पिटल शामिल हैं। जांच टीमों को कई अस्पतालों में आयुष्मान योजना से संबंधित आवश्यक जानकारी, टोल फ्री नंबर और शिकायत दर्ज कराने के लिए संपर्क विवरण प्रदर्शित नहीं मिले। कुछ अस्पतालों में बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण और संक्रमण से बचाव के इंतजामों में भी कमियां पाई गईं। एक अस्पताल में पैथोलॉजी लैब उपलब्ध नहीं थी और किसी मान्यता प्राप्त लैब के साथ अनुबंध भी नहीं मिला। वहीं, एक अन्य अस्पताल में बेसमेंट में ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू संचालित होने की जानकारी सामने आई। अग्निशमन उपकरणों से संबंधित आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध नहीं थी। इसके अतिरिक्त राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत घटिया गुणवत्ता वाले इंप्लांट लगाए जाने की शिकायतें भी जांच के दौरान सामने आईं। साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि जांच में सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित अस्पतालों से जवाब मांगा जा रहा है। अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा जाएगा कि उनके खिलाफ योजना से सूचीबद्धता समाप्त करने और वित्तीय नुकसान की वसूली जैसी कार्रवाई क्यों न की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पतालों से प्राप्त जवाबों की समीक्षा के बाद नियमानुसार जुर्माना लगाने, आयुष्मान योजना से बाहर करने और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयुष्मान योजना के पात्र लाभार्थियों को बिना अतिरिक्त भुगतान के सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों।
