
मुंबई। कोकण क्षेत्र में बिना पूर्ण अनुमति और वैध कागजातों के संचालित खदानों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। चंद्रशेखर बावनकुळे ने स्पष्ट कहा है कि अधूरे दस्तावेजों के आधार पर किसी भी खदान को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी और जिला प्रशासन को इस पर कड़ी निगरानी रखनी होगी। बुधवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों में गौण खनिज खदानों और क्रशर इकाइयों की स्थिति की समीक्षा की गई। इस दौरान सुनील प्रभू भी उपस्थित रहे। मंत्री बावनकुळे ने कहा कि सरकार का उद्देश्य खदानों को बंद करना नहीं है, लेकिन उनके पास सभी आवश्यक अनुमति और दस्तावेज होना अनिवार्य है। उन्होंने खनन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन अनुमति प्रणाली लागू करने और उत्खनन व रॉयल्टी के बीच सटीक समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
एकीकृत अनुमति प्रणाली पर जोर
उन्होंने बताया कि पहले 500 ब्रास तक उत्खनन की अनुमति तहसीलदार और 2000 ब्रास तक की अनुमति उपविभागीय अधिकारी देते थे। लेकिन अब रॉयल्टी बचाने के लिए खदानों को छोटे हिस्सों में बांटकर अनुमति लेने के मामले सामने आए हैं। इसे रोकने के लिए सभी अनुमतियों के अधिकार जिलाधिकारी को देने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सॉफ्टवेयर आधारित निगरानी
पुणे जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर का अध्ययन कर उसे पूरे राज्य में लागू करने की योजना है, ताकि खनन गतिविधियों की बेहतर निगरानी हो सके और राजस्व नुकसान रोका जा सके।
रायगढ़ में अस्थायी अनुमति
रायगढ़ जिले में पर्यावरणीय स्वीकृति के अभाव में बंद की गई कुछ खदानों को राहत देते हुए, आदिती तटकरे के अनुरोध पर तीन महीने की अस्थायी अनुमति देने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए संबंधित खनन संचालकों को पर्यावरण स्वीकृति के लिए आवेदन का प्रमाण और निर्धारित समय में अनुमति प्राप्त करने का लिखित आश्वासन देना होगा।सरकार ने स्पष्ट किया है कि खनन गतिविधियों में नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।




