HomeMaharashtraमुंबई में जल्द शुरू होगी बिना चीरा लगाए पोस्टमॉर्टम की अत्याधुनिक तकनीक:...

मुंबई में जल्द शुरू होगी बिना चीरा लगाए पोस्टमॉर्टम की अत्याधुनिक तकनीक: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

मुंबई। महाराष्ट्र में पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी दिशा में मुंबई में जल्द ही नॉन-इनवेसिव पोस्टमॉर्टम यानी बिना चीरा लगाए शव परीक्षण की तकनीक शुरू की जाएगी। इसके साथ ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए व्यापक उपायों के परिणामस्वरूप पिछले दो से तीन वर्षों में लंबित रिपोर्टों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। बुधवार को यह जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान परिषद में प्रश्नोत्तर काल के दौरान दी। इस विषय पर सदस्य चित्रा वाघ ने मूल प्रश्न उठाया, जबकि सदस्य सतेज पाटील, अंबादास दानवे, प्रज्ञा सातव और डॉ. नीलम गोऱ्हे ने पूरक प्रश्न पूछे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि महाराष्ट्र में वर्तमान में कुल 533 पोस्टमॉर्टम केंद्र कार्यरत हैं और इस वर्ष मई महीने तक इन केंद्रों पर 10,905 शव परीक्षण किए जा चुके हैं। पोस्टमॉर्टम केंद्रों पर बढ़ते कार्यभार को देखते हुए आवश्यक मानव संसाधन, आधारभूत सुविधाओं और अन्य कमियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी तथा निर्धारित समयसीमा में उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि अत्याधुनिक नॉन-इनवेसिव पोस्टमॉर्टम तकनीक के माध्यम से बिना चीरा लगाए शव परीक्षण करना संभव होगा। इस तकनीक से पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया में लगने वाले समय की बचत होगी और कम मानव संसाधन की आवश्यकता पड़ेगी। इसके साथ ही मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी तथा शरीर में होने वाले अत्यंत सूक्ष्म परिवर्तनों का भी अधिक सटीक तरीके से विश्लेषण किया जा सकेगा। मुंबई के जे.जे. अस्पताल और केईएम अस्पताल में इस अत्याधुनिक तकनीक को शुरू करने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि दोनों अस्पतालों में आवश्यक उपकरणों की खरीद और निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और जल्द ही नॉन-इनवेसिव पोस्टमॉर्टम की सुविधा शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि पहले पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्राप्त करने में छह महीने से लेकर एक वर्ष तक का समय लग जाता था। इसके कारण पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया में भी देरी होती थी। लेकिन पिछले दो से तीन वर्षों में न्यायवैद्यक प्रयोगशालाओं के कामकाज में तेजी लाकर लंबित रिपोर्टों की संख्या में बड़ी कमी लाई गई है। उन्होंने बताया कि पहले करीब तीन लाख रिपोर्ट लंबित थीं, जिन्हें अब घटाकर लगभग 75 हजार तक लाया गया है। राज्य सरकार का प्रयास है कि अगले तीन से चार महीनों में लंबित मामलों की संख्या को सामान्य स्तर पर लाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिको-लीगल मामलों और जिन मामलों में विसेरा सुरक्षित रखा गया है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा, ताकि महत्वपूर्ण मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी पोस्टमॉर्टम केंद्रों पर कार्यभार समान नहीं है। कुछ केंद्रों पर नियमित रूप से शव परीक्षण के मामले नहीं आते, जबकि दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों में स्थित पोस्टमॉर्टम केंद्रों पर अत्यधिक दबाव रहता है। इसे देखते हुए राज्य सरकार सभी पोस्टमॉर्टम केंद्रों की सुविधाओं और आवश्यकताओं की व्यापक समीक्षा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यक स्थानों पर शवों को सुरक्षित रखने के लिए शीतगृह की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिन केंद्रों पर अतिरिक्त मानव संसाधन, उपकरण या आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता है, वहां समीक्षा के बाद आवश्यक सुधार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया और रिपोर्ट से संबंधित जानकारी की गोपनीयता को लेकर भी सख्त रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया से संबंधित जानकारी को गोपनीय रखना अनिवार्य है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पुलिस को सौंपे जाने से पहले उससे जुड़ी किसी भी जानकारी को सार्वजनिक करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति पोस्टमॉर्टम से संबंधित गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करता है या नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments