सूखे के बीच बच्चों और माताओं के पोषण पर विशेष फोकस, महिला एवं बाल विकास विभाग ने बढ़ाई तैयारी

305 तालुकों में सूखा घोषित, आंगनवाड़ी केंद्रों से पोषण आहार, स्वास्थ्य जांच और प्रवासी परिवारों तक सेवाएं पहुंचाने पर जोर

मुंबई। बदलते मौसम, बढ़ते तापमान और बारिश की कमी के कारण महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बन गई है। इसका असर केवल खेती और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के दैनिक जीवन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर भी पड़ रहा है। खासकर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव की आशंका को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने विशेष उपाय शुरू किए हैं। राज्य सरकार ने 305 तालुकों में सूखा घोषित किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के माध्यम से राज्य के एक लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों से बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और अन्य पात्र लाभार्थियों को पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। राज्य में 1,08,627 आंगनवाड़ी सेविकाएं और 1,05,470 सहायिकाएं कार्यरत हैं। सूखे की स्थिति में भोजन, पानी और ईंधन की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए आंगनवाड़ी केंद्रों में गर्म ताजा भोजन, घर ले जाने वाला आहार (THR) और अमृत आहार नियमित रूप से उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। जिला स्तर की आहार आपूर्ति समितियों को खाद्यान्न भंडार, पानी और ईंधन की स्थिति की समीक्षा कर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर आहार मेनू में अस्थायी बदलाव भी किए जा सकते हैं, ताकि लाभार्थियों को पोषण आहार मिलना बंद न हो। जिन गांवों में टैंकर से पानी की आपूर्ति हो रही है, वहां आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राथमिकता से पानी उपलब्ध कराने के लिए ग्राम पंचायतों और जलापूर्ति समितियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। गर्म भोजन तैयार करने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों को भी पानी और ईंधन उपलब्ध कराने की पूर्व तैयारी की जा रही है। दूषित पानी से होने वाली बीमारियों को देखते हुए बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की नियमित स्वास्थ्य जांच पर भी जोर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से पानी शुद्ध करने के लिए क्लोरीन का उपयोग, आंगनवाड़ी केंद्रों में ORS पैकेट और जिंक की गोलियों का पर्याप्त भंडार तथा जरूरी दवाइयां और विटामिन उपलब्ध कराने की योजना है। कुपोषण की स्थिति पर नजर रखने के लिए आंगनवाड़ी सेविकाएं बच्चों का हर महीने वजन और लंबाई दर्ज करेंगी और जानकारी पोषण ट्रैकर में अपडेट की जाएगी। गंभीर कुपोषित बच्चों को VCDC/UCDC के माध्यम से अतिरिक्त ऊर्जा-युक्त पोषण आहार दिया जाएगा। गंभीर स्वास्थ्य समस्या वाले बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों के लिए विशेष परामर्श सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र महिलाओं तक समय पर पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। सूखे के कारण रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले गन्ना कटाई मजदूरों, ईंट-भट्ठा श्रमिकों और अन्य परिवारों के बच्चों तथा महिलाओं को सेवाओं से वंचित न रहना पड़े, इसके लिए भी अलग व्यवस्था की जा रही है। प्रवासी लाभार्थियों की जानकारी माइग्रेशन ट्रैकिंग सिस्टम में दर्ज की जाएगी और सहकारी संस्थाओं तथा चीनी मिलों से समन्वय कर प्रवासी मजदूरों की सूची प्राप्त की जाएगी। प्रवासी परिवार जहां भी रहेंगे, वहां के ग्रामीण या शहरी आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से उन्हें पूरक पोषण आहार, स्वास्थ्य जांच और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है। विभाग का उद्देश्य है कि सूखे की कठिन परिस्थिति में भी कोई बच्चा, गर्भवती महिला, स्तनपान कराने वाली माता या किशोरी आवश्यक पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।

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