वाराणसी में ‘शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का उद्घाटन, भारत-जापान मित्रता को समर्पित
सीएम योगी और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे ने किया लोकार्पण, रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में दिवंगत जापानी प्रधानमंत्री की स्मृतियों को किया गया संजोया

वाराणसी, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे ने बुधवार को वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में संयुक्त रूप से ‘शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का उद्घाटन किया। इस कॉरिडोर को दिवंगत जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की स्मृति और भारत-जापान के मजबूत संबंधों को समर्पित किया गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अकी आबे को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अकी आबे ने मेमोरियल कॉरिडोर के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन उनके पति को सम्मान देता है और इसमें शामिल होने का अवसर मिलना उनके लिए खुशी की बात है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के प्रति भी हार्दिक आभार व्यक्त किया।
अकी आबे ने काशी और जापान के प्राचीन शहर क्योटो के बीच समानता का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों शहरों के नाम ‘क’ अक्षर से शुरू होते हैं और दोनों ही प्राचीन शहर हैं। उन्होंने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के निर्माण में शिंजो आबे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कन्वेंशन सेंटर की बाहरी दीवारों पर 108 प्रतीकात्मक रुद्राक्ष लगाए गए हैं। जापान में भी 108 संख्या का विशेष महत्व है। दिसंबर के अंतिम दिन जापान के बौद्ध मंदिरों में 108 बार घंटियां बजाई जाती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अपने पति शिंजो आबे के बीच भावनात्मक एवं आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए अकी आबे भावुक हो गईं। उन्होंने याद किया कि 2015 में शिंजो आबे ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ काशी की यात्रा की थी और गंगा आरती में हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि वाराणसी आकर यहां सब कुछ अपनी आंखों से देखने की उनकी दिली इच्छा थी, जो अब पूरी हुई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिंजो आबे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर भारत और जापान के रणनीतिक, सांस्कृतिक और राजनयिक संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि काशी भगवान विश्वनाथ की भूमि होने के साथ भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश से जुड़ी पवित्र धरती भी है। योगी ने कहा कि बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, परिवहन और आर्थिक विकास के क्षेत्र में जापान भारत का भरोसेमंद और प्रमुख भागीदार रहा है। उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, दिल्ली मेट्रो सहित विभिन्न मेट्रो परियोजनाओं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में भारत-जापान सहयोग का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट के पास करीब 500 एकड़ में ‘जापान सिटी’ विकसित की जा रही है। जापानी निवेशकों की सहायता के लिए ‘इन्वेस्ट यूपी’ में विशेष ‘यामानाशी डेस्क’ स्थापित किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार और जापान का यामानाशी प्रान्त स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन पायलट परियोजना पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। योगी ने कहा कि भारत में लगभग 1,400 जापानी कंपनियां कार्यरत हैं। उन्होंने शिंजो आबे के भारत के साथ संबंधों और योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें वर्ष 2021 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2027 में भारत-जापान संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है। साथ ही सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशांबी और संकिसा जैसे भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों का उल्लेख करते हुए भारत-जापान के सांस्कृतिक और बौद्ध संबंधों को रेखांकित किया। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर भारत-जापान सहयोग का प्रमुख प्रतीक है। इसका निर्माण जापान की सहायता से किया गया था और 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया था। यहां बनाई गई फोटो गैलरी में दिसंबर 2015 की वे तस्वीरें भी प्रदर्शित हैं, जब शिंजो आबे प्रधानमंत्री मोदी के साथ वाराणसी आए थे और गंगा आरती में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में स्वतंत्र प्रभार मंत्री रविंद्र जायसवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महापौर अशोक कुमार तिवारी, छावनी विधायक सौरभ श्रीवास्तव, जापान से आया उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, काशी के प्रमुख नागरिक और स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।
