महाराष्ट्र में निवेश बढ़ाएं चेक कंपनियां, सरकार देगी तेज सहयोग: सीएम फडणवीस

उन्नत विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, रक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और खनन क्षेत्र में साझेदारी पर जोर

मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चेक गणराज्य की कंपनियों से भारत और वैश्विक बाजार के लिए अधिक से अधिक उत्पादन महाराष्ट्र में करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि चेक कंपनियां और संस्थाएं ठोस निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत करें तो महाराष्ट्र सरकार उन्हें तेजी से सहयोग देगी। राज्य सरकार महाराष्ट्र और चेक गणराज्य के बीच उद्योग एवं निवेश साझेदारी का नया अध्याय शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। गुरुवार को चेक गणराज्य के उपप्रधानमंत्री एवं व्यापार मंत्री कैरोल हॅवलॉक के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री फडणवीस से उनके सरकारी निवास ‘वर्षा’ पर मुलाकात की। इस दौरान महाराष्ट्र में औद्योगिक अवसरों, निवेश, उन्नत तकनीक और दीर्घकालीन भागीदारी पर चर्चा हुई। बैठक में चेक गणराज्य के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, मुंबई स्थित महावाणिज्य दूतावास तथा खनन और औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। महाराष्ट्र सरकार की ओर से राजशिष्टाचार मंत्री जयकुमार रावल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्र, प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, डॉ. पी. अन्बळगन, सचिव डॉ. राजेश गवांदे और मुख्यमंत्री के निवेश सलाहकार कौस्तुभ धवसे उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र भारत की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ विदेशी निवेश का भी प्रमुख केंद्र है। राज्य ने वर्ष 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र केवल अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाना नहीं चाहता, बल्कि उन्नत विनिर्माण, तकनीक और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनना चाहता है। फडणवीस ने कहा कि मुंबई और चेक गणराज्य के संबंध एक सदी से अधिक पुराने हैं। वर्ष 1920 में तत्कालीन चेकोस्लोवाकिया ने मुंबई में वाणिज्य दूतावास शुरू किया था। अब इन ऐतिहासिक संबंधों को केवल व्यक्तिगत निवेश तक सीमित न रखते हुए अधिक संरचित और दीर्घकालीन औद्योगिक साझेदारी में बदलने की जरूरत है।
इलेक्ट्रिक वाहन और उन्नत तकनीक में निवेश का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्नत विनिर्माण और वाहन क्षेत्र में सहयोग की बड़ी संभावना है। स्कोडा कंपनी पिछले 25 वर्षों से भारत में कार्यरत है और पुणे तथा छत्रपति संभाजीनगर में उसके उत्पादन संयंत्र हैं। उन्होंने चेक कंपनियों से इलेक्ट्रिक वाहन, प्रिसीजन इंजीनियरिंग, मशीनरी, ऑटोमेशन और ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़े टियर-वन और टियर-टू आपूर्तिकर्ताओं को महाराष्ट्र में निवेश के लिए आगे आने का आह्वान किया। इसके अलावा एयरोस्पेस, रक्षा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और उन्नत तकनीक में चेक गणराज्य की क्षमताओं को पुणे, छत्रपति संभाजीनगर, नाशिक और नागपुर के औद्योगिक समूहों तथा वैज्ञानिक संस्थानों से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। फडणवीस ने कहा कि दोनों देशों की कंपनियों और संस्थाओं को केवल खरीद-बिक्री तक सीमित न रहकर संयुक्त उपक्रम, तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास तथा सह-उत्पादन पर जोर देना चाहिए।
शिक्षा और कौशल विकास में भी सहयोग
मुख्यमंत्री ने चेक टेक्निकल यूनिवर्सिटी, चार्ल्स यूनिवर्सिटी और ब्रनो यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी जैसे संस्थानों से महाराष्ट्र में शैक्षणिक अवसर विकसित करने की संभावनाएं तलाशने का आग्रह किया। उन्होंने संयुक्त डिग्री कार्यक्रम, शोध कार्यक्रम, पीएचडी और विद्यार्थी आदान-प्रदान योजनाओं पर भी सहयोग का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में इंजीनियरों, तकनीशियनों, आईटी पेशेवरों और कुशल युवाओं का बड़ा मानव संसाधन उपलब्ध है। चेक उद्योगों की जरूरत के अनुसार तकनीशियन, इंजीनियर, आईटी प्रोफेशनल, नर्स और अन्य कुशल मानवबल के लिए संरचित महाराष्ट्र-चेक कौशल साझेदारी विकसित की जा सकती है।
ऊर्जा और खनन क्षेत्र में चेक तकनीक पर चर्चा
चेक गणराज्य के उपप्रधानमंत्री कैरोल हॅवलॉक ने कहा कि उनका देश महाराष्ट्र सरकार के साथ दीर्घकालीन सहयोग के लिए उत्सुक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्देश्य केवल तकनीक की बिक्री नहीं, बल्कि तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान और संभव होने पर उपकरणों का स्थानीय उत्पादन भी है। बैठक में कोयला गुणवत्ता प्रबंधन के लिए चेक तकनीक पर विशेष चर्चा हुई। इसमें कोयले की गुणवत्ता मापने वाले ऑनलाइन विश्लेषक, स्वचालित नमूना संग्रह प्रणाली, कोयला मिश्रण एवं गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली और कोयला भंडारों में स्वतः आग लगने की घटनाओं को रोकने वाली थर्मल विजन प्रणाली की जानकारी दी गई। चेक माइनिंग टेक्नोलॉजी एसोसिएशन की करीब 90 सदस्य कंपनियां भूमिगत और खुली खदानों, बिजली संयंत्रों, सुरक्षा उपकरणों, फिल्ट्रेशन, वेंटिलेशन और वायु प्रदूषण कम करने वाली तकनीक उपलब्ध कराती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि चेक कंपनियां खनिज उत्खनन से लेकर परिवहन और अंतिम प्रसंस्करण तक आवश्यक तकनीक उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि चेक गणराज्य महाराष्ट्र को केवल भारत के प्रवेशद्वार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार के लिए एक मजबूत उत्पादन केंद्र के रूप में भी देख सकता है।

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