कोंकण में खारे और मीठे पानी की मछलियों के संवर्धन के लिए बनेंगे अलग-अलग मत्स्य बीज केंद्र

मत्स्यव्यवसाय मंत्री नितेश राणे ने प्रस्तावों में तेजी लाने के दिए निर्देश, वशिष्ठी नदी से गाद निकालने और नए ड्रेजर की खरीद पर भी चर्चा

मुंबई। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में खारे और मीठे पानी की मछलियों के संवर्धन के लिए अलग-अलग मत्स्य बीज केंद्र स्थापित करने के प्रस्तावों में तेजी लाई जाएगी। मत्स्यव्यवसाय मंत्री नितेश राणे ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जलसंपदा महामंडल के अधिकार क्षेत्र में आने वाली जमीन के संबंध में आवश्यक कार्रवाई पूरी कर सकारात्मक निर्णय के बाद महामंडल के संचालक मंडल का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए। सोमवार को मंत्रालय में विधायक शेखर निकम द्वारा चिपलून की वशिष्ठी खाड़ी से गाद निकालने और रत्नागिरी जिले में सरकारी जमीन पर मत्स्य बीज केंद्र स्थापित करने के संबंध में उठाए गए मुद्दों पर आयोजित बैठक में मंत्री राणे ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में मत्स्य विभाग ने स्पष्ट किया कि कोंकण में बड़ी क्षमता वाला मत्स्य बीज केंद्र स्थापित करने के लिए प्रस्तावित दो हेक्टेयर जमीन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कम से कम पांच हेक्टेयर और संभव हो तो आठ से दस हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता होगी। खाड़ी के किनारे लगभग 40 एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध है, जिसका उपयोग खारे पानी की मछलियों के संवर्धन के लिए किया जा सकता है। मंत्री राणे ने इस जमीन पर रासायनिक तत्वों के संभावित प्रभाव की जांच के लिए तकनीकी निरीक्षण करने के निर्देश दिए। मीठे पानी की मछलियों के संवर्धन के लिए नहर के पास जलसंपदा विभाग के अधिकार क्षेत्र में आने वाली जमीन का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। मंत्री ने कहा कि महामंडल की जमीन हस्तांतरित करने के लिए नियमानुसार संचालक मंडल का प्रस्ताव आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों को इस प्रक्रिया का अनुसरण कर प्रस्ताव संचालक मंडल के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। जमीन उपलब्ध होने के बाद मत्स्य बीज केंद्र का निर्माण शुरू किया जा सकेगा। बैठक में वशिष्ठी नदी से गाद निकालने के अगले चरण पर भी चर्चा हुई। विधायक शेखर निकम ने बताया कि जलसंपदा विभाग द्वारा नदी में किए गए कार्यों से बाढ़ की तीव्रता कम करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि अगले चरण में गाद निकालने का काम पूरा होने से चिपलून में बाढ़ के खतरे को और कम किया जा सकेगा। साथ ही दाभोल से पेढे तक राष्ट्रीय जलमार्ग क्रमांक 28 के नौवहन मार्ग को साफ करने से यात्री और मालवाहक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
महाराष्ट्र समुद्री मंडल ने अपने निर्धारित क्षेत्र में नौवहन मार्ग खुला रखने की जिम्मेदारी स्वीकार की है। हालांकि, बाढ़ नियंत्रण के उद्देश्य से नदी और खाड़ी की पूरी गाद निकालने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और जलसंपदा विभाग की होगी। बैठक में स्पष्ट किया गया कि रेत उत्खनन और नदी या खाड़ी से गाद निकालने की अनुमति अलग-अलग होती है। गाद निकालने के लिए संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी को स्वतंत्र सीआरजेड अनुमति प्राप्त करनी होगी। आवश्यकता पड़ने पर महाराष्ट्र समुद्री मंडल अनापत्ति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएगा। मंत्री राणे ने कहा कि पानी से बाहर के सूखे हिस्सों में जमा गाद जलसंपदा विभाग के यांत्रिकी विभाग के माध्यम से निकाली जा सकती है, लेकिन पानी के भीतर गहराई तक जमा गाद निकालने के लिए आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम ड्रेजर की आवश्यकता होगी। उन्होंने रत्नागिरी के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि तटीय जिले की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन और जिला नियोजन समिति के निधि से नया ड्रेजर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए। ड्रेजर की खरीद से पहले उसकी कार्यक्षमता और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों में उपयोगिता की तकनीकी जांच भी की जाए। बैठक में रत्नागिरी के जिलाधिकारी मनुज जिंदाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। वहीं, मत्स्य आयुक्त, जलसंपदा विभाग और महाराष्ट्र समुद्री मंडल के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *