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राज्य में मूल्य आधारित शिक्षा के दूसरे चरण का होगा विस्तार, जिम्मेदार नागरिक तैयार करना समय की आवश्यकता: मुख्यमंत्री फडणवीस

मुंबई। विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल, सामाजिक जिम्मेदारी और अच्छे नागरिकत्व के गुण विकसित करने के लिए मूल्य आधारित शिक्षा को और व्यापक बनाने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में ‘मूल्यवर्धन कार्यक्रम 2.0’ को बड़े स्तर पर लागू करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में सजग और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने के लिए मूल्य आधारित शिक्षा समय की आवश्यकता बन गई है।
शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण, प्रशिक्षण से बढ़ रहा विद्यार्थियों का आत्मविश्वास
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक केवल ज्ञान देने का कार्य नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों में सकारात्मक परिवर्तन लाने और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने का भी काम करते हैं। मूल्यवर्धन कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षकों को दिए जा रहे प्रशिक्षण से विद्यार्थियों के मन में मौजूद भय, संकोच और शंकाएं दूर हो रही हैं तथा सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन रही है। स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भूसे ने कहा कि इस पहल से विद्यार्थियों और अभिभावकों की भागीदारी बढ़ी है तथा विद्यालयों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित की जा रही है, जिसकी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है।
विद्यालयों में दिख रहे सकारात्मक परिणाम, अलग समय देने पर विचार
बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता शांतिलाल मुथा ने बताया कि जिला परिषद स्कूलों में यह कार्यक्रम अत्यंत प्रभावी साबित हो रहा है और शिक्षकों का कार्य उल्लेखनीय है। शिक्षा आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि विद्यालयों के समयबद्ध कार्यक्रम में मूल्य आधारित शिक्षा के लिए अलग से दो घंटे निर्धारित करने पर विचार किया जा रहा है। वहीं एससीईआरटी के निदेशक हेमंत वासेकर ने कहा कि इस पहल से शिक्षण पद्धति में गुणात्मक सुधार देखने को मिला है। बैठक में पुणे, यवतमाल, नांदेड़, पालघर और गडचिरोली के शिक्षकों ने ऑनलाइन माध्यम से अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कार्यक्रम के कारण विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ा है, कक्षा में उनकी सहभागिता में सुधार हुआ है और विद्यालयों का वातावरण अधिक सकारात्मक बना है। मुख्यमंत्री ने इस पहल के सफल क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों, सहयोगी संस्थाओं और संबंधित अधिकारियों की सराहना की।

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