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सरपंच संतोष देशमुख हत्याकांड: बीड की विशेष अदालत ने चार आरोपियों की बरी करने की याचिका खारिज की

मुंबई। महाराष्ट्र के बीड ज़िले में सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के मामले में एक अहम फैसला सुनाते हुए विशेष मकोका अदालत ने चार आरोपियों की आरोपमुक्ति याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ मुकदमे को जारी रखने के लिए ‘पर्याप्त प्रथमदृष्टया आधार’ मौजूद हैं और वे संगठित अपराध गिरोह से जुड़े प्रतीत होते हैं। मकोका न्यायाधीश वी.एच.पटवाडकर द्वारा 11 नवंबर को पारित आदेश के अनुसार, आरोपी लगातार गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं। मामले से जुड़े मुख्य आरोपी वाल्मीक कराड, जो राकांपा नेता और पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे के करीबी माने जाते हैं, समेत आठ लोगों को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका), एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत गिरफ्तार किया गया है।
ऊर्जा कंपनी से फिरौती की मांग का आरोप
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि कराड और अन्य आरोपियों ने अवादा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से कैज तालुका में अपने व्यवसाय के संचालन की अनुमति देने के बदले ₹2 करोड़ की फिरौती मांगी थी। धमकी दी गई थी कि रकम न देने पर कंपनी का काम रोक दिया जाएगा। ज्ञात हो कि 9 दिसंबर 2024 की है, जब मस्साजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख ने फिरौती वसूली की कोशिश का विरोध किया। अभियोजन के अनुसार, हस्तक्षेप करने पर आरोपियों ने उनका अपहरण कर लिया, प्रताड़ित किया और हत्या कर दी। आरोप है कि शव को दैथाना फाटा पर फेंक कर आरोपी फरार हो गए।
चार आरोपियों ने बरी होने की मांग की
प्रतीक घुले, सुधीर सांगले, महेश केदार और जयराम चाटे ने अदालत में याचिका दायर कर दावा किया कि वे निर्दोष हैं और राजनीति के कारण फंसाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ मकोका के तहत मामला नहीं बनता। राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने अदालत से कहा कि यदि आरोपियों को अभी ही बरी कर दिया गया, तो वे भविष्य में भी गंभीर अपराध कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि मामले में उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि गवाहों के बयान और दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से आरोपियों की संलिप्तता दर्शाते हैं। अदालत ने कहा- प्रथमदृष्टया आवेदकों/अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई करने के पर्याप्त आधार हैं। इसलिए वे आरोपमुक्ति के हकदार नहीं हैं। इस फैसले के साथ अब चारों आरोपियों पर मुकदमा नियमित रूप से चलेगा और मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

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