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गुरु तेग बहादुरजी का बलिदान धार्मिक स्वतंत्रता और मानव गरिमा का प्रेरणादायी प्रतीक: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

नवी मुंबई। बेलापुर स्थित पंजाब हेरिटेज भवन में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने ‘श्री गुरु तेग बहादुरजी का विरासत’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। श्री गुरु तेग बहादुरजी के 350वें शहादत दिवस के अवसर पर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय, साहित्य अकादमी, नई दिल्ली तथा पंजाबी कल्चरल एंड वेलफेयर एसोसिएशन, नवी मुंबई द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि अन्य धर्मों के अनुयायियों की धार्मिक स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले श्री गुरु तेग बहादुरजी का जीवन और विचार केवल ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि आधुनिक लोकतंत्र, सामाजिक सौहार्द और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए एक जीवंत प्रकाशस्तंभ हैं। राज्यपाल ने कहा कि महाराष्ट्र और पंजाब के बीच सदियों पुराने गौरवशाली आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंध हैं। दोनों राज्य समान मूल्यों, आदर्शों और साहस की परंपरा को संजोने वाले ‘जुड़वां राज्य’ हैं। श्री गुरु तेग बहादुरजी का सर्वोच्च बलिदान भारत के नागरिक और सांस्कृतिक इतिहास का एक अद्वितीय एवं प्रेरणादायी अध्याय है। उन्होंने कहा कि गुरुजी ने केवल अपने अनुयायियों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को बिना भय के अपने धर्म का पालन करने के अधिकार जैसे सार्वभौमिक मूल्य के लिए बलिदान दिया और ‘हिंद दी चादर’ बने। भारतीय संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को गुरुजी ने सदियों पहले अपने जीवन और कार्यों के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित किया। राज्यपाल ने कहा कि आज के सामाजिक और मानसिक तनाव के दौर में गुरु तेग बहादुरजी की शिक्षाएं हमें आंतरिक शक्ति, विनम्रता, करुणा और निःस्वार्थ सेवा की दिशा दिखाती हैं।
विश्वविद्यालय में ‘श्री गुरु तेग बहादुर चेयर’ स्थापित करने का सुझाव
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने महाराष्ट्र के 65 सार्वजनिक एवं निजी विश्वविद्यालयों में से किसी एक विश्वविद्यालय में ‘श्री गुरु तेग बहादुर चेयर’ स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यह चेयर अंतरधार्मिक संवाद, शोध, अध्यापन तथा गुरुजी के विवेक और स्वतंत्रता के संदेश के प्रचार-प्रसार के लिए एक स्थायी केंद्र के रूप में कार्य कर सकती है। कार्यक्रम में वन मंत्री गणेश नाईक, विधायक मंदा म्हात्रे, नवी मुंबई की महापौर सुजाता पाटील, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नरनावरे, कोंकण विभागीय राजस्व आयुक्त रुबल अग्रवाल, नवी मुंबई महानगरपालिका आयुक्त डॉ. कैलास शिंदे, ठाणे जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक, उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा, हरियाणा साहित्य एवं सांस्कृतिक अकादमी के अध्यक्ष कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री, साहित्य अकादमी के सचिव वरुण गुलाटी, तख्तश्री अबचल नगर हुजूर साहिब के प्रशासक विजय सतबीर सिंह, राज्यपाल के संयुक्त सचिव एस. राममूर्ति सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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