
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। रसोई गैस के दामों में लगातार हो रही वृद्धि से आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफे के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। महंगाई के इस दौर में रसोई का बजट संभालना लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
महिलाओं ने जताई नाराजगी
गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों को लेकर लोगों में रोष है। महिलाओं का कहना है कि पहले से ही खाद्य पदार्थों और सब्जियों के दाम बढ़े हुए हैं, ऐसे में रसोई गैस महंगी होने से स्थिति और कठिन हो गई है। कस्बे की गृहणी विमला देवी ने कहा कि पहले गैस सस्ती होने के कारण खाना बनाना आसान था, लेकिन अब सिलेंडर भरवाना जेब पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो लोगों को फिर से चूल्हे और लकड़ियों का सहारा लेना पड़ेगा।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के सामने संकट
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन पाने वाले परिवारों के सामने अब सिलेंडर भरवाने की समस्या खड़ी हो गई है। कई ग्रामीणों का कहना है कि कनेक्शन तो मिल गया, लेकिन सिलेंडर दोबारा भरवाना महंगा पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में कई परिवार फिर से उपले और लकड़ियों से खाना बनाने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे धुएं के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं।
छोटे कारोबार पर भी असर
गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ढाबों, होटलों और जलपान गृहों पर भी देखने को मिल रहा है। लागत बढ़ने के कारण चाय और नाश्ते के दाम बढ़ाने पड़े हैं, जिससे ग्राहकों की संख्या में कमी आई है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद वे तुरंत दाम नहीं बढ़ा सकते, जिससे उनका मुनाफा घट रहा है। उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण किया जाए और रसोई गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।




