महाराष्ट्र में रिक्शा-टैक्सी चालकों को सीखनी होगी मराठी, 18 अगस्त 2027 के बाद नियमों का होगा सख्ती से पालन
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की अपील— स्थगन को मराठी सीखने से बचने का रास्ता न समझें, 1.65 लाख से अधिक गैर-मराठी चालकों को दिया जा चुका प्रशिक्षण

मुंबई। महाराष्ट्र में व्यवसाय करते हुए यहां के लोगों से संवाद के लिए मराठी भाषा सीखना केवल अपेक्षा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। राज्य में रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित यात्री वाहन चलाने वाले गैर-मराठी भाषी चालक स्थगन का आधार लेकर मराठी सीखने की अनदेखी न करें। ‘महाराष्ट्र माझा! मराठी माझी संवाद भाषा!’ अभियान के दूसरे चरण में शामिल होकर व्यावहारिक मराठी सीखें। यह अपील राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने की है। महाराष्ट्र में रहने और व्यवसाय करने वाले चालकों को यात्रियों से आत्मविश्वास के साथ मराठी में बातचीत करने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग, राज्य मराठी विकास संस्था और कोंकण मराठी साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा पाठ्यक्रम अभियान’ चलाया जा रहा है। अभियान के पहले चरण में राज्यभर में 180 से अधिक स्थानों पर शाखाएं शुरू की गईं। करीब 1,800 शिक्षकों के माध्यम से 1 लाख 65 हजार 800 से अधिक गैर-मराठी चालकों को व्यावहारिक मराठी का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके बावजूद राज्य में अभी भी करीब 8 से 9 लाख गैर-मराठी चालक रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित वाहन चला रहे हैं। इन चालकों तक पहुंचने के लिए अभियान का दूसरा चरण शुरू किया गया है। सरनाईक ने जिन चालकों ने अब तक मराठी नहीं सीखी है, उनसे जल्द प्रशिक्षण कक्षाओं में नाम दर्ज कराने अथवा ऑनलाइन माध्यम से मराठी सीखने की अपील की है। परिवहन मंत्री ने बताया कि व्यावहारिक मराठी से संबंधित संशोधित कानून के क्रियान्वयन को कुछ रिक्शा-टैक्सी संगठनों की मांग पर मुख्यमंत्री ने 18 अगस्त 2027 तक स्थगित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस स्थगन का अर्थ कानून का रद्द होना नहीं है। सरनाईक ने चेतावनी देते हुए कहा, “स्थगन मराठी सीखने से बचने का अवसर नहीं, बल्कि खुद को तैयार करने के लिए मिली समय-सीमा है। इस अवधि में व्यावहारिक मराठी सीख लें। 18 अगस्त 2027 के बाद कानून लागू करते समय नियमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य महाराष्ट्र की भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने के साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना तथा यात्रियों और चालकों के बीच संवाद को आसान बनाना है।परिवहन मंत्री ने गैर-मराठी चालकों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा— “आज मराठी सीखें, कल की कार्रवाई से बचें।” उन्होंने अधिक से अधिक चालकों से अभियान के दूसरे चरण में शामिल होने की अपील की।
