सूखे की स्थिति में पशुपालकों को राहत: सूखे चारे की कीमत 12 रुपये और हरे चारे 8 रुपये किलो तय

मुंबई। सूखे की स्थिति में संभावित चारा संकट से निपटने और पशुपालकों को राहत देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने चारा खरीद की दरें निर्धारित की हैं। पशुधन के लिए खरीदे जाने वाले सूखे चारे की अधिकतम आधारभूत कीमत परिवहन खर्च को छोड़कर 12 रुपये प्रति किलो, जबकि हरे चारे (मुरघास) की अधिकतम आधारभूत कीमत 8 रुपये प्रति किलो तय की गई है। शुक्रवार को यह जानकारी पर्यावरण एवं पशुसंवर्धन मंत्री पंकजा मुंडे ने दी। सरकार के इस फैसले से चारे की कमी के दौरान पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
304 तहसीलों में सूखा घोषित, अध्ययन समूह की रिपोर्ट को मंजूरी
राज्य में खरीफ सीजन की स्थिति की समीक्षा के बाद अब तक कुल 304 तहसीलों में सूखा घोषित किया जा चुका है। इसी पृष्ठभूमि में संभावित चारा संकट से निपटने के लिए राजस्व मंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने एक अध्ययन समूह का गठन किया था। इस अध्ययन समूह में पंकजा मुंडे भी सदस्य थीं। समूह ने महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में चारा प्रबंधन के उपायों का अध्ययन किया और उपलब्ध चारे, संभावित उत्पादन तथा आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट को 27 अक्टूबर को हुई मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक में मंजूरी दी गई।
सूखे की अवधि तक लागू रहेंगी निर्धारित दरें
सरकार द्वारा निर्धारित ये दरें राहत एवं पुनर्वास विभाग की ओर से घोषित सूखे की अवधि तक लागू रहेंगी। जिला स्तर पर सूखा प्रबंधन कार्यकारी समिति अध्ययन समूह की रिपोर्ट में दिए गए प्रावधानों और राहत एवं पुनर्वास विभाग के निर्देशों के अनुसार चारा खरीद की प्रक्रिया पूरी करेगी। चारे के परिवहन के लिए परिवहन आयुक्त द्वारा समय-समय पर निर्धारित दरें लागू होंगी।
चारे की गुणवत्ता के लिए भी तय किए मानक
सरकार ने चारे की गुणवत्ता को लेकर भी स्पष्ट मानक तय किए हैं। खरीदे जाने वाले सूखे चारे में नमी अधिकतम 15 प्रतिशत होनी चाहिए। चारा अच्छी स्थिति में होना चाहिए तथा उसमें खट्टी या सीलन की गंध, फफूंद, कीड़े और मिट्टी नहीं होनी चाहिए। ज्वार और बाजरा के चारे को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, हरे चारा पूरी तरह हवा से सुरक्षित और फफूंद रहित होना आवश्यक है। उसमें नमी 62 से 70 प्रतिशत, पीएच स्तर 3.5 से 4.4 और क्रूड प्रोटीन कम से कम 7 प्रतिशत होना चाहिए। अन्य गुणवत्ता मानकों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के आईएस 19562 : 2026 के प्रावधान लागू होंगे।
पशुधन को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित चारा
मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि राज्य में सूखे की स्थिति के दौरान किसानों के सामने खेती के साथ-साथ पशुधन के चारे की समस्या भी गंभीर हो जाती है। पशुधन किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है, इसलिए सूखे के समय उन्हें पर्याप्त चारा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से सूखे चारे और हरे चारे के लिए आधारभूत कीमतें निर्धारित करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का उद्देश्य केवल चारे की कीमत तय करना नहीं, बल्कि पशुधन को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित चारा उपलब्ध कराना भी है। इसके लिए गुणवत्ता संबंधी मानक निर्धारित किए गए हैं। जिला स्तर पर उचित नियोजन और सख्ती से अमल के जरिए सूखे की स्थिति में किसानों और पशुपालकों को राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।

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