दिवाली से पहले सूखा प्रभावित किसानों को अधिकतम मदद देने की तैयारी: मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले
पंचनामे जारी, केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल करेगा महाराष्ट्र का दौरा, किसानों को कर्ज वसूली के लिए फोन करने वाली बैंकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुंबई। महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पंचनामे का काम जारी है और रिपोर्ट मिलते ही सहायता के मानदंड, फसल बीमा योजना तथा राज्य सरकार की मदद का समन्वय कर दिवाली से पहले किसानों को अधिकतम सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। मंगलवार को सूखा संबंधी मंत्रिमंडलीय उपसमिति के अध्यक्ष एवं राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल महाराष्ट्र का दौरा करने वाला है और उसके दौरे के स्थान तय करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में राज्य की सूखा राहत व्यवस्था, उपलब्ध जल भंडारण और फसल-पानी की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके बाद मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक में किसानों और खेत मजदूरों को केंद्र में रखते हुए विभिन्न उपायों पर चर्चा हुई। बावनकुले ने कहा कि राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के साथ निजी वित्तीय संस्थाओं को इस अवधि में कर्ज वसूली के लिए किसानों को फोन नहीं करना चाहिए। किसानों पर कर्ज वसूली के लिए दबाव बनाने वाली बैंकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। मुख्य सचिव को रिजर्व बैंक के अधिकारियों से चर्चा कर बैंकों के लिए आवश्यक निर्देश जारी कराने तथा जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैंक बैठकें आयोजित करने को कहा गया है।
265 तालुकों के बाद 19 और क्षेत्रों को शामिल करने की प्रक्रिया
राज्य में सूखा राहत उपायों के लिए पहले 265 तालुके घोषित किए गए थे। इससे पहले बाहर रह गए 19 तालुकों को शामिल कर वहां 20 प्रतिशत फसल सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया गया है। कुछ और तालुकों को शामिल करने की मांग पर जिलाधिकारियों को प्राथमिक निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर मंत्रिमंडलीय उपसमिति आगे फैसला करेगी। ई-केवाईसी पूरी नहीं होने के कारण लंबित फसल ऋण तत्काल उपलब्ध कराने के लिए किसानों की ई-केवाईसी पूरी कराने का निर्णय लिया गया है। एग्रीस्टैक पर दर्ज नहीं हुए किसानों का पंजीकरण कर उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। डिजिटल फसल सर्वेक्षण में आने वाली ऑनलाइन समस्याओं को दूर करने की कार्रवाई भी शुरू करने को कहा गया है।
राज्य में बनेंगी ‘चारा बैंक’
सूखे के दौरान पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य में चारा बैंक बनाने की तैयारी की गई है। वन विभाग की खाली जमीन, तालाब क्षेत्रों और जल संसाधन विभाग के तालाबों से लगी सरकारी जमीन पर घास के क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। विदर्भ सहित धान उत्पादक क्षेत्रों में धान की पराली को जलाने के बजाय उसका भंडारण कर पशु चारे के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाएगा। दूसरे राज्यों से चारा मंगाने के बजाय महाराष्ट्र में उपलब्ध संसाधनों से अधिकतम चारा उत्पादन की योजना बनाई जाएगी। इसके लिए कंपनियों से CSR के माध्यम से सहयोग भी लिया जाएगा। जिन क्षेत्रों में मिट्टी में नमी और सीमित पानी उपलब्ध है, वहां रबी सीजन में चना और ज्वार की खेती को प्राथमिकता देने की योजना है। बावनकुळे ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ज्वार की शत-प्रतिशत खरीद को मंजूरी दिए जाने से किसानों को राहत मिलेगी।
निर्माण कार्यों में पीने के पानी के इस्तेमाल पर लगेगी रोक
बंद पड़ी पेयजल योजनाओं को दोबारा शुरू करने और भूजल पुनर्भरण के लिए रिचार्ज शाफ्ट योजना लागू करने पर भी बैठक में चर्चा हुई। निर्माण कार्यों में शुद्ध पेयजल के बजाय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी का इस्तेमाल आवश्यक करने के लिए शासन निर्णय जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। प्रत्येक जिले की जल स्थिति अलग होने के कारण पालकमंत्री की अध्यक्षता में जिला स्तरीय जल उपयोग निगरानी समिति गठित करने पर भी चर्चा की गई। सूखा राहत कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए जिला नियोजन समिति के फंड से सीमेंट सड़कें बनाने के बजाय गांवों और शहरों के बुनियादी कार्यों तथा सूखा राहत उपायों पर जोर दिया जाएगा। विधानसभा और विधान परिषद सदस्यों को भी अपने निधि से ₹25 लाख तक के कार्य सूखा राहत के लिए कराने की अनुमति दी गई है। बैठक में मंत्री पंकजा मुंडे, दत्तात्रय भरणे, मकरंद पाटील, नितेश राणे, गुलाबराव पाटील, संजय राठोड, जयकुमार गोरे, प्रताप सरनाईक, गिरीष महाजन, बाबासाहेब पाटील और मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
