मुंबई-MMR में 30 लाख घर बनाने की तैयारी, ठाणे से क्लस्टर विकास को नई रफ्तार
सिद्धेश्वर नगर-रमाबाई नगर क्लस्टर का भूमिपूजन, करीब 6 हजार परिवारों को मिलेगा सुरक्षित घर, 23 नागरिक सुविधाओं के साथ बनेगी ‘सिटी विदिन द सिटी’

ठाणे। मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में आवास की बढ़ती जरूरत को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अगले 15 से 20 वर्षों में करीब 30 लाख घर बनाने की योजना तैयार की है। इसके साथ मुंबई, ठाणे, मीरा-भायंदर, भिवंडी, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर सहित MMR के विभिन्न शहरों में क्लस्टर पुनर्विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को ठाणे महानगरपालिका की सिद्धेश्वर नगर-रमाबाई नगर क्लस्टर पुनर्विकास योजना के भूमिपूजन समारोह में यह जानकारी दी।
शिंदे ने कहा कि यूनिफाइड डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशंस (UDCPR) में किए गए बदलावों से क्लस्टर और स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) की पुनर्विकास परियोजनाओं को गति मिली है। सरकार का उद्देश्य केवल नई इमारतें खड़ी करना नहीं, बल्कि पुनर्विकास के साथ बेहतर नागरिक सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर लोगों के जीवनस्तर में बदलाव लाना है। सिद्धेश्वर नगर-रमाबाई नगर क्लस्टर परियोजना करीब 20 हेक्टेयर यानी लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इससे करीब 6 हजार परिवारों को सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना को केवल आवासीय पुनर्विकास के बजाय एक नियोजित टाउनशिप के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना में 23 प्रकार की नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें चौड़ी सड़कें, जलापूर्ति, सीवरेज और कचरा प्रबंधन, उद्यान, खेल मैदान, सामुदायिक सभागृह, जिम, योग केंद्र, इनडोर गेम्स की सुविधा, डिजिटल लाइब्रेरी, डे-केयर सेंटर, वरिष्ठ नागरिक मनोरंजन केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, महिला सशक्तिकरण केंद्र और स्मार्ट स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसे ‘सिटी विदिन द सिटी’ की अवधारणा पर विकसित करने की बात कही गई है। शिंदे ने कहा कि ठाणे में खतरनाक और जर्जर इमारतों के पुनर्विकास को लेकर करीब दो दशकों से प्रयास किए जा रहे हैं। नीतिगत अड़चनों को दूर करने के बाद क्लस्टर योजना आगे बढ़ सकी। किसन नगर में क्लस्टर पुनर्विकास का पहला प्रमुख चरण अब पूरा होने की दिशा में है और सिद्धेश्वर नगर इसका अगला महत्वपूर्ण चरण है। क्लस्टर योजना में आवासीय इमारतों के साथ व्यावसायिक विकास को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। ‘वॉक टू वर्क’ की अवधारणा के तहत लोगों को उनके घर के आसपास ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। शिंदे ने कहा कि क्लस्टर का अर्थ केवल नया घर देना नहीं, बल्कि बेहतर घर, अच्छी नागरिक सुविधाएं, रोजगार और बेहतर जीवनस्तर उपलब्ध कराना है। सिद्धेश्वर तालाब के पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण को भी परियोजना में शामिल किया गया है। शिंदे ने रहवासियों की कॉर्पस फंड, अतिरिक्त 100 वर्ग फुट जगह और छोटे दुकानदारों के पुनर्वास संबंधी मांगों पर विचार करने की बात कही। उन्होंने विकासकों से मकानों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करने को भी कहा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रो, कोस्टल रोड और ठाणे-बोरीवली भूमिगत मार्ग जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से आने वाले वर्षों में ठाणे की कनेक्टिविटी और विकास को और गति मिलेगी। भूमिपूजन समारोह में पूर्व मंत्री एवं विधायक जितेंद्र आव्हाड, सांसद नरेश म्हस्के, विधायक निरंजन डावखरे, विधायक रविंद्र फाटक, महापौर शर्मिला पिंपळोलकर, उपमहापौर कृष्णा पाटील, ठाणे महानगरपालिका आयुक्त सौरभ राव सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
