योजना दिल्ली से नहीं, जिले की जमीन से बनती है’: शिवराज सिंह चौहान

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के राष्ट्रीय सम्मेलन में 50 से अधिक जिलों के कलेक्टर और वैज्ञानिक हुए शामिल

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब नीतियां जमीनी जरूरतों के आधार पर बनती हैं और सभी विभाग एक दिशा में समन्वय से काम करते हैं तो कोई भी जिला विकास की दौड़ में पीछे नहीं रह सकता। सोमवार को वे पूसा परिसर स्थित भारत रत्न सी. सुब्रह्मण्यम सभागार में आयोजित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। देशभर के 50 से अधिक जिलों के कलेक्टर, वैज्ञानिक और वरिष्ठ नीति-निर्माताओं की मौजूदगी में चौहान ने कहा कि योजना का खाका दिल्ली के दफ्तरों में नहीं, बल्कि जिलों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। उन्होंने कलेक्टरों से हर महीने कृषि कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा करने और जहां काम धीमा है, वहां विभागीय समन्वय से गति बढ़ाने को कहा। केंद्रीय मंत्री ने कृषि को जल शक्ति, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता, किसान उत्पादक संगठन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और एमएसएमई कौशल विकास से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों, ‘आत्मा’, कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर के वैज्ञानिकों के शोध को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। चौहान ने कहा कि योजना में कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और कमजोर संस्थागत ऋण वाले 100 जिलों को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन पर दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने तथा किसान क्रेडिट कार्ड के विस्तार के माध्यम से विशेषकर पूर्वी भारत और पिछड़े जिलों में ऋण प्रवाह तेज करने पर जोर दिया। सम्मेलन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के कार्यों को भी साझा किया गया। गढ़चिरोली में जल संरक्षण और सूखा प्रबंधन, अल्लूरी सीताराम राजू जिले में कम पानी वाली उच्च मूल्य की बागवानी फसलों तथा बांका में प्राकृतिक खेती और भूमि पुनरुद्धार मॉडल के प्रयासों का उल्लेख किया गया। किश्तवाड़, कोरबा और फाजिल्का के कृषि नवाचारों की भी सराहना की गई। चौहान ने अधिकारियों से कहा कि विकसित और समृद्ध भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि और ग्रामीण विकास तंत्र को पूरी क्षमता के साथ काम करना होगा। सम्मेलन में केंद्रीय राज्य मंत्रियों, विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों, आईसीएआर के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्यों के कृषि उत्पादन आयुक्तों, प्रमुख सचिवों और जिला कलेक्टरों ने भाग लिया।

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