दिव्यांगों को सहानुभूति नहीं, समान अवसर देने की जरूरत: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा
मुंबई में 11 दिव्यांगों को व्हीलचेयर वितरित, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 32 हस्तियों को राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार

मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को उनकी दिव्यांगता के बजाय उनकी क्षमता, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के नजरिए से देखा जाना चाहिए। उनके प्रति केवल सहानुभूति व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए। राज्यपाल वर्मा लोकभवन सेवा संकल्प अभियान के तहत वर्मा फाउंडेशन और मैत्री पीस फाउंडेशन की ओर से मुंबई के वाई.बी. चव्हाण सभागार में आयोजित व्हीलचेयर वितरण शिविर एवं राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर महामंडलेश्वर राजेश ओझा महाराज, मैत्री पीस फाउंडेशन के अध्यक्ष सुरजीत बरुआ, सचिव मिलन पारेख, वर्मा फाउंडेशन के अध्यक्ष वासुमुदुमुरी वर्मा, पी.एन. स्वामी महाराज, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, पद्मश्री पुरस्कार विजेता सोमा घोष, समाजसेवक नवीन चंद्र और राहुल पाटील सहित विभिन्न क्षेत्रों के लोग उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि जनसेवा और लोककल्याण से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को एक साथ लाने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ समाज में सेवा भावना को मजबूत करने का माध्यम है। दिव्यांगों को नि:शुल्क व्हीलचेयर उपलब्ध कराना इसी सेवा संकल्प का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि व्हीलचेयर केवल आवागमन का सहायक उपकरण नहीं, बल्कि दिव्यांग व्यक्ति के लिए सम्मान, स्वतंत्रता और अवसर का माध्यम भी है। समाज को यह देखने की जरूरत है कि किसी व्यक्ति में क्या कमी है, इसके बजाय उसमें मौजूद असाधारण गुण और क्षमताएं क्या हैं। राज्यपाल ने कहा कि दिव्यांग कल्याण को केवल सहायता तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनके सशक्तीकरण और समावेशी विकास पर जोर देना होगा। ‘सुगम्य भारत अभियान’ जैसे प्रयासों के माध्यम से सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को दिव्यांगों के लिए अधिक सुलभ बनाया जा रहा है। सरकार नीतियां और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन वास्तविक सामाजिक बदलाव के लिए प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं से दिव्यांग व्यक्तियों की गतिशीलता, सहायक उपकरण, शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जुड़ी जरूरतों की पहचान कर उन्हें उचित सरकारी योजनाओं एवं संस्थाओं से जोड़ने का आह्वान किया। राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त करने वालों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक उपलब्धि के पीछे मेहनत, चुनौतियों और दृढ़ संकल्प की कहानी होती है। उन्होंने पुरस्कार विजेताओं से सम्मान को नई सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में लेने का आह्वान किया। समारोह में 11 दिव्यांग व्यक्तियों को व्हीलचेयर प्रदान की गईं, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 32 हस्तियों को राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग की समान भागीदारी से ही ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
