महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतरिम अनुमति

20 जिला परिषदों और 211 पंचायत समितियों में चुनाव कराने की तैयारी, ओबीसी आरक्षण पर अंतिम फैसला अभी बाकी

मुंबई। महाराष्ट्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़े कानूनी विवाद के कारण लंबे समय से लंबित स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरक्षण विवाद पर अंतिम निर्णय लंबित होने के बावजूद शेष स्थानीय निकायों के चुनाव अंतरिम व्यवस्था के तहत कराए जा सकते हैं। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।
20 जिला परिषदों और 211 पंचायत समितियों में चुनाव
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने अदालत को बताया कि पहले के आदेश के तहत 12 जिला परिषदों में चुनाव हो चुके हैं, जबकि 20 जिला परिषदों और 211 पंचायत समितियों के चुनाव अभी बाकी हैं। उन्होंने आग्रह किया कि ओबीसी आरक्षण पर अंतिम सुनवाई लंबित रहने के कारण स्थानीय निकायों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जाना चाहिए।
आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का मुद्दा बरकरार
मामले में प्रमुख विवाद अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए कुल आरक्षण की सीमा को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुसार, स्थानीय निकायों में इन वर्गों के लिए कुल आरक्षण सामान्यतः 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। ओबीसी आरक्षण की वैधता और निर्धारित सीमा से जुड़े प्रश्नों पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।
राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को क्यों रोका जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि शेष चुनावों के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं और राज्य सरकार चुनाव आयोग को पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने सहित जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे। चुनाव आयोग और राज्य सरकार को चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने तथा इस संबंध में अदालत को जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से लंबित चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुला है।

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