
मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी.राधाकृष्णन ने गुरुवार को राजभवन, मुंबई में आयोजित ‘मराठी भाषा गौरव दिवस’ कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने मराठी गद्य और काव्य पाठ तथा गायन कार्यक्रम ‘माए लेकरे’ का अवलोकन किया। यह विशेष आयोजन पुणे स्थित सांस्कृतिक संगठन ‘कलंगन’ चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया गया था।
मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने पर खुशी
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल राधाकृष्णन ने ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक और कवि वी.वी. शिरवाडकर ‘कुसुमाग्रज’ की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि भाषा के संरक्षित रहने से संस्कृति भी संरक्षित रहेगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे घर पर मराठी भाषा का अधिक उपयोग करें और बच्चों को प्रतिदिन कम से कम एक पृष्ठ मराठी पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
महाराष्ट्र और तमिलनाडु के सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश
राज्यपाल ने महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज की जिंजी और वेल्लोर की विजय को याद किया। उन्होंने कहा कि व्यंकोजी भोसले और बाद में सरफोजी भोसले ने तंजावुर में मराठी संस्कृति को संरक्षित रखते हुए तमिल भाषा और साहित्य का भी संरक्षण किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक संबंध को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
‘माए लेकरे’ कार्यक्रम की प्रस्तुति
‘माए लेकरे’ (माँ और बच्चा) कार्यक्रम की संकल्पना और संयोजन डॉ. अरुणा ढेरे ने किया था। इसमें वरिष्ठ अभिनेता डॉ. गिरीश ओक और मृणाल कुलकर्णी ने गद्य और कविता का पाठ किया, जबकि ‘कलंगन’ की संस्थापक चैत्राली अभ्यंकर ने गीत प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम के माध्यम से माँ और बच्चे के गहरे संबंधों को साहित्य और संगीत के माध्यम से बेहद भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
उपस्थित गणमान्य अतिथि
कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नरनावरे, उप सचिव एस. राममूर्ति, संचालक एडवोकेट अमित दाते सहित कला, संगीत और साहित्य जगत से जुड़े कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। यह आयोजन मराठी भाषा की समृद्धि और संस्कृति के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम था।




