तकनीक से प्रतिस्पर्धा नहीं, उसे हिंदी की शक्ति बनाने की जरूरत: डॉ. कृष्णकांत दुबे

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। क्षेत्र के ग्राम रसूलपुर रूरी स्थित श्री विशंभर दयाल त्रिपाठी राजकीय महाविद्यालय में हिंदी दिवस के अवसर पर विचार गोष्ठी एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. कृष्णकांत दुबे ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, संवेदना और सभ्यता की जीवंत धरोहर होती है। समय के साथ भाषा की अभिव्यक्ति के रूप भले बदलते रहें, लेकिन उसकी आत्मा कभी नहीं बदलती। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए डॉ. दुबे ने कहा, “हिंदी को तकनीक से प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता नहीं, बल्कि तकनीक को हिंदी की शक्ति बनाने की आवश्यकता है।” उन्होंने बदलते डिजिटल दौर में हिंदी के बढ़ते महत्व और नई तकनीकों के साथ उसके समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। विचार गोष्ठी में महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. नलिन कुमार सिंह, डॉ. नवनीत कौर, डॉ. अरविन्द कुमार, अमित कुमार प्रजापति, डॉ. कुलदीप कुमार शुक्ला और डॉ. रजनी द्विवेदी ने हिंदी भाषा के महत्व और बदलते स्वरूप पर अपने विचार व्यक्त किए। इसके बाद आयोजित भाषण प्रतियोगिता में शिवानी पाल, सालिहा खातून, निखिल कुमार, पायल, जितेंद्र कुमार, लक्ष्मीकांत, हर्ष श्रीवास्तव, आंचल सिंह, शिवम, गीतेश और आदर्श शुक्ला सहित विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने सोशल मीडिया में हिंदी की लोकप्रियता, डिजिटल शिक्षा में हिंदी की भूमिका, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में हिंदी की संभावनाएं और डिजिटल पत्रकारिता में हिंदी की स्थिति जैसे समसामयिक विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में विनीत कुमार, डॉ. कुलदीप कुमार सिंह, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. प्रिया वर्मा, डॉ. रजनी द्विवेदी और अनिल कुमार सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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