
मुंबई। मुंबई क्राइम ब्रांच ने जाली दस्तावेजों के जरिए महंगी गाड़ियों पर लोन लेकर उन्हें अवैध रूप से दूसरे राज्यों में बेचने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने बड़े कारोबारियों के सिबिल स्कोर का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और बैंकों से लोन लेकर लग्जरी कारें खरीदीं। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार कर 7.30 करोड़ रुपये की 16 लग्जरी कारें जब्त की हैं। गिरफ्तार आरोपियों में रवींद्र दीनानाथ गिरकर उर्फ प्रदीप रवींद्र शर्मा (47), मनीष सुभाष शर्मा (39), सैयद नावेद सैयद जुल्फिकार अली (52), दानिश रफीक खान (32), साईनाथ वेंकटेश गंजी (29), यशकुमार सुनील कुमार जैन (33) और इमान अब्दुल वाहिद खान उर्फ देवा (38) शामिल हैं। ये आरोपी इंदौर (मध्य प्रदेश), कल्याण, डोंबिवली, ठाणे, भिवंडी और कुर्ला के रहने वाले हैं। मामला तब सामने आया जब महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज के कर्मचारी कल्पक म्हात्रे ने दो साल पहले विक्रोली के पार्कसाइट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 3 ने रवींद्र दीनानाथ गिरकर को हिरासत में लिया, जिसने अपराध स्वीकार किया। उसके बयान के आधार पर, डीसीपी दत्ता नलवाडे और वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने इंदौर, कल्याण, डोंबिवली और ठाणे में छापेमारी कर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरोह व्यापारियों के CIBIL स्कोर तक पहुंचकर उनके नाम पर जाली दस्तावेज तैयार करता था और विभिन्न बैंकों से वाहन ऋण प्राप्त करता था। नई लग्जरी कारें खरीदने के बाद, चेसिस नंबर बदलकर उन्हें उत्तर प्रदेश, दिल्ली और गुजरात में कम कीमतों पर बेच दिया जाता था। आरोपी आधार कार्ड, पैन कार्ड, आरसी बुक, एमएमआरडीए आवंटन पत्र, बैंक स्टेटमेंट और आईटी रिटर्न के नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे।
इसके अलावा, चोरी की गई गाड़ियों को बेचने से पहले उनके चेसिस और इंजन नंबर बदल दिए जाते थे। पुलिस ने अब तक 16 लग्जरी वाहन बरामद किए हैं और गिरोह में शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है।




